शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

127..एक कदम आयुर्वेद की ओर: आज बात करेंगे जामुन की... जिसका हर अंग औषधि है

 

एक कदम आयुर्वेद की ओर: आज बात करेंगे जामुन की... जिसका हर अंग औषधि है


 
आजकल मैं एलोपैथी से आज‍िज आए अपने हेल्थ सेक्टर की दुर्दशा देखकर होम्योपैथी व आयुर्वेेद का कुछ कुछ अध्ययन कर रही हूं ..इसी कड़ी में  आज जामुन के करतबों की बात करना बहुत जरूरी लगा..तो सोचा शेयर करूं क‍ि इस नायाब औषध‍ि और बहुमूल्य प्राकृत‍िक देन को हम कि‍तना  कम कर के आंकते रहे...।    
बरसात के मौसम में बाजारों में नजर आने वाला गहरे बैंगनी रंग का जामुन केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण वृक्ष माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी जड़, छाल, पत्तियां, फल और लकड़ी—हर हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी है। यही कारण है कि इसे “औषधीय गुणों का भंडार” कहा जाता है।
अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।
जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।
पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है।
दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं।
भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।
स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।
एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं।
जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।

जामुन की गुठली सेहत के लिए बहुत गुणकारी होती है। यह मुख्य रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र सुधारने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है।
जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल कि‍या जाता था ।
जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटेड मेडीकल साइंसेज में वाहरा पी. , रेडेकर एस., पवार एस., पाट‍िल वी. ने अपनी र‍िसर्च में कहा है क‍ि - 

पौधों ने कई सदियों से इंसानों को हर्बल कॉस्मेटिक्स दिए हैं और समय के साथ उनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सिज़ीगियम क्यूमिनी, जो मायर्टेसी परिवार से है और जिसे आमतौर पर यूजेनिया जंबोलाना के नाम से जाना जाता है, फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होता है। जामुन या ब्लैक प्लम, भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है, जिसमें श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। यह पेड़ ट्रॉपिकल और सबट्रॉपिकल क्लाइमेट में फलता-फूलता है, और अक्सर जंगलों, नदी के किनारों और खुले खेतों में उगता है। जामुन के कॉस्मेटिक फायदों पर हाल ही में की गई जांच इस रिव्यू का मुख्य टॉपिक है। जामुन के इन फॉर्मूलेशन की खासियत यह है कि इनमें एंटी-एजिंग, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट जैसे फायदेमंद गुण होते हैं, और ये फोटोएजिंग को भी कम करते हैं। मुख्य फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स में टैनिन, फ्लेवोनोइड्स, टेरपेनोइड्स, सैपोनिन, फेनोलिक एसिड और एसेंशियल ऑयल्स शामिल हैं। सिज़ीगियम क्यूमिनी फार्माकोलॉजिकल और आयुर्वेदिक दोनों तरह के फायदे दिखाता है, जो कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन में एक कीमती हिस्सा है। लिटरेचर रिव्यू और अलग-अलग रिसर्च स्टडीज़ के अनुसार, सिज़ीगियम क्यूमिनी (पत्ती) और (बीज) तेलों में एंटीकोलेजनेज, एंटी-इलास्टेस और एंटी-हायल्युरोनिडेस एक्टिविटीज़ देखी गईं। इसलिए, हेल्दी स्किन के लिए कॉस्मेटिक तैयारियों में एस. क्यूमिनी तेलों पर विचार किया जाना चाहिए। जामुन कॉस्मेटिक और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री दोनों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

चूं क‍ि आयुर्वेद किसी एक बीमारी के लिए फिक्स दवा नहीं बताता, बल्कि शरीर की प्रकृति के अनुसार इलाज करता है। तो पहले अपने शरीद की प्रकृत‍ि समझें... तब जामुन को लेकर उक्त तथ्य अपनी जरूरत अनुसार प्रयोग क‍िये जा सकते हैं। दैन‍िक जीवन में भी जामुन की लकड़ी, गुठली का बुरादा आद‍ि को इस्तेमाल में लाकर देखें... गजब का र‍िजल्ट देते हैं। 



- अलकनंदा स‍िंंह 

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

126 ..एक एफ आई आर ऐसा भी

 


लाला बहुत परेशान था. उसने कई जगह फोन किया अन्ततः सोचा, थाने जाना ही ठीक रहेगा.

उसने थाने जाकर आपबीती सुनाई-
"साहब! मेरा सेल्समेन तेईस लाख रुपये लेकर भाग गया है, दो नम्बर का पैसा नहीं है; दो दिन की बिक्री की रकम थी. दरअसल बैंक के सभी काम वही करता था,
रोज की तरह कल भी वह पैसा लेकर बैंक गया और वापस नहीं आया. वह बैंक भी नहीं पहुँचा, उसका मोबाइल भी बंद है; कृपया उसे पकड़िए".
थानेदार व डिप्टी-थानेदार ने सब बातें ध्यान से सुना और सेठ जी को दिलासा देते हुए कहा-
"हकीकत पता करके बताते हैं,आप निश्चिंत होकर घर जाइए, एफ आई आर की कॉपी बाद में ले जाना".
लाला जी के जाने के बाद थानेदार ने सब इंस्पेक्टर से कहा-
"एफ आई आर लिख लो और उसमें लिखना कि नौकर की लाश फला जगह पड़ी मिली,
अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ लूट व हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. तफ़तीश जारी है, बाक़ी देख लेना."
लेने के देने पड़े

रविवार, 9 अगस्त 2026

125 ....दुख का कारण....अलक




एक व्यापारी को नींद न आने की बीमारी थी। उसका नौकर मालिक की बीमारी से दुखी रहता था। एक दिन व्यापारी अपने नौकर को सारी संपत्ति देकर चल बसा। 

सम्पत्ति का मालिक बनने के बाद नौकर रात को सोने की कोशिश कर रहा था, किन्तु अब उसे नींद नहीं आ रही थी। एक रात जब वह सोने की कोशिश कर रहा था, उसने कुछ आहट सुनी। 
देखा, एक चोर घर का सारा सामान समेट कर उसे बांधने की कोशिश कर रहा था, परन्तु चादर छोटी होने के कारण गठरी बंध नहीं रही थी।

नौकर ने अपनी ओढ़ी हुई चादर चोर को दे दी और बोला, 
इसमें बांध लो। उसे जगा देखकर चोर सामान छोड़कर भागने लगा। किन्तु नौकर ने उसे रोककर हाथ जोड़कर कहा,  भागो मत, इस सामान को ले जाओ ताकि मैं चैन से सो सकूँ। 
इसी ने मेरे मालिक की नींद उड़ा रखी थी और अब मेरी। 

उसकी बातें सुन चोर की भी आंखें खुल गई।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

124 ...तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता

 क आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था। लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (skin Disease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी। खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।



स बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया। Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी। लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही। समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

ह उसे उसी तरह प्यार करता रहा। एकदिन उस लड़की की मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दुखी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।

सने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नी तुम्हारी मदद किया करती थी.” पति ने जवाब दिया, “दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ। मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। क्योंकि यदि मेरी पत्नी को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।

सलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नी थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.” .. ...

---सीख--- 
खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियों के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए.. और उन कमियों को नजरअंदाज कर देना चाहिए...

शनिवार, 25 जुलाई 2026

123 ..नौजवान चोर है

 एक बार एक बूढ़े आदमी ने हैअफवाह फैलाई कि उसके पड़ोस में रहने वाला नौजवान चोर  l


यह बात दूर - दूर तक फैल गई आस - पास के लोग उस नौजवान से बचने लगे l नौजवान परेशान हो गया कोई उस पर विश्वास ही नहीं करता था l

तभी गाँव में चोरी की एक वारदात हुई और शक उस नौजवान पर गया उसे गिरफ्तार कर लिया
गया l लेकिन कुछ दिनों के बाद सबूत के अभाव में वह निर्दोष साबित हो गया l निर्दोष साबित होने के बाद वह नौजवान चुप नहीं बैठा, उसने बूढ़े आदमी पर गलत आरोप लगाने के लिए
मुकदमा दायर कर दिया। 

पंचायत में बूढ़े आदमी ने अपने बचाव में सरपंच से कहा l 'मैंने जो कुछ कहा था, वह एक टिप्पणी से अधिक कुछ नहीं था किसी को नुकसान पहुंचाना मेरा मकसद नहीं था।
सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा, 'आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं, और जाते समय उस कागज के टुकड़े - टुकड़े करके घर के रस्ते पर फ़ेंक दें कल फैसला सुनने के लिए आ जाएँ

बूढ़े व्यक्ति ने वैसा ही किया l
अगले दिन सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा कि फैसला सुनने से पहले आप बाहर जाएँ और उन कागज के टुकड़ों को, जो आपने कल बाहर फ़ेंक दिए थे, इकट्ठा कर ले आएं।
बूढ़े आदमी ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता। उन टुकड़ों को तो हवा कहीं से कहीं उड़ा कर ले गई होगी। अब वे नहीं मिल सकेंगें, मैं कहाँ - कहाँ उन्हें खोजने के लिए जाऊंगा ?

सरपंच ने कहा 'ठीक इसी तरह, एक सरल - सी टिप्पणी भी किसी का मान - सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है, जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता। इसलिए यदि किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें।
वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, ताकि हम शब्दों के दास न बनें।
#ज्वलंत 
#हिंदी ब्लॉगिंग

122 ..जिंदा में भी चमत्कार, मर कर भी चमत्कार!

 मुझे एक कहानी बहुत प्रीतिकर है–सूफियों की कहानी है।


एक फकीर ने एक सम्राट के द्वार पर अपना भिक्षापात्र रखा। सुबह-सुबह थी और सम्राट अपने बगीचे से घूम कर महल में प्रवेश कर रहा था। सम्राट ने कहा, क्या चाहते हो?
फकीर ने कहा, क्या का सवाल नहीं है। एक बात चाहता हूं कि मेरा भिक्षापात्र खाली न रहे। चाहे कंकड़-पत्थरों से भर दो, मगर भर दो। रिक्तता काटती है। खाली नहीं रहना चाहता। मेरा भिक्षापात्र भर दो।
सम्राट ने कहा, यह भी कोई बहुत बड़ा सवाल है! इतना छोटा सा भिक्षापात्र, अभी भरवाए देते हैं!
लेकिन उस फकीर ने फिर कहा कि देखना, खयाल रखना। शर्त यह है कि भिक्षापात्र भरना चाहिए, नहीं तो हटूंगा नहीं द्वार से।



सम्राट ने कहा, अरे पागल! तूने मुझे समझा क्या है, कोई भिखमंगा समझा है? अपने वजीरों को बुला कर कहा कि भर दो सोने से इसका भिक्षापात्र!
स्वर्ण-अशर्फियां डाली गईं। मगर उसका भिक्षापात्र अद्भुत था। डाली गईं स्वर्ण-अशर्फियां, आवाज भी न करें और खो जाएं। खन-खन की आवाज भी न हो। जैसे किसी अतल गहराई में गिर गईं! छोटा सा भिक्षापात्र और जब झांक कर देखो तो उनका पता ही न चले। खजाना खाली होने लगा। दोपहर हो गई, सारी राजधानी इकट्ठी हो गई, खबर आग की तरह फैल गई कि सम्राट ने एक झंझट ले ली। बड़े-बड़े युद्ध जीता, एक फकीर से हारा जा रहा है। और फकीर अपना भिक्षापात्र लिए खड़ा है और अपना चमीटा बजा रहा है।
और वह कहता है कि तब तक नहीं हटूंगा…जब शर्त स्वीकार की है तो मेरा भिक्षापात्र भर दो। और राजा के आंसू निकले आ रहे हैं और राजा की कमर टूटी जा रही है। हीरे-जवाहरात भी चले गए, सोना-चांदी भी चला गया। जो कुछ भी था पास, सब समाप्त हो गया। सांझ होतेऱ्होते खजाने खाली हो गए। वजीरों ने कहा, अब हमारे पास कुछ भी नहीं है।
सम्राट उसके पैरों पर गिर पड़ा और कहा, मुझे क्षमा करो! मगर जाने के पहले एक राज बता जाओ, तुम्हारे इस भिक्षापात्र का क्या रहस्य है?
उस फकीर ने कहा, इसका कोई रहस्य नहीं है। इसे मैंने आदमी की खोपड़ी से बनाया है। न आदमी की खोपड़ी कभी भरती है, न यह भिक्षापात्र कभी भरता है। इसका कोई बड़ा राज नहीं है। ऐसे ही मरघट पर यह खोपड़ी मिल गई थी, इसको घिस-घिस कर, ठीक-ठाक करके मैंने भिक्षापात्र बना लिया। जब मैंने बनाया था भिक्षापात्र, मुझे भी यह राज पता नहीं था। वह तो जब मैंने चीजें इसमें रखीं और खो गईं, तब मैं चौंका कि वाह! वाह रे आदमी! जिंदा में भी चमत्कार, मर कर भी चमत्कार!
प्रस्तुति- स्वामी अद्वैत भारती
बोधि मठ इंटरनेशनल (कोसी)
डुमरी, पूर्णिया, बिहार- 095708 85495

शनिवार, 4 जुलाई 2026

121 सच्ची ताकत एकता में ही निहित है

 



कल बसंत की हल्की धूप लेने को मै अपने घर के पिछले गार्डन में गई..

उस दौरान मैंने कुछ असामान्य देखा: दर्जनों चींटियाँ पानी की एक बड़ी बोतल में गिर गई थीं।

शुरुआत में, जब वे साफ पानी में संघर्ष कर रही थीं, तो ऐसा लगा जैसे वे जीवित रहने के लिए एक-दूसरे को नीचे धकेल रही हों। यह सोचकर मुझे घृणा हुई, इसलिए मैंने अपनी नज़रें हटा लीं।

लेकिन दो घंटे बाद, उत्सुकता के कारण मैंने उन्हें फिर से देखा।

और मैं दंग रह गई।

चींटियाँ एक-दूसरे को डुबो नहीं रही थीं। उन्होंने अपने शरीरों से एक जीवित द्वीप बना लिया था — एक छोटा सा, चलता-फिरता बेड़ा। कुछ नीचे रहकर दूसरों का सहारा बनी हुई थीं, और फिर वे बारी-बारी से अपनी जगह बदल रही थीं ताकि हर किसी को आराम मिल सके।

उनमें से किसी ने भी पहले खुद को बचाने की कोशिश नहीं की।

वे पूरी शांति और बेहतरीन तालमेल के साथ हिल-डुल रही थीं, जैसे वे सभी एक बात समझती हों: जीवित रहना तभी संभव है जब सब साथ हों।

मैंने धीरे से पानी में एक चम्मच डाला। एक-एक करके, चींटियाँ बाहर निकलने लगीं — 
कोई घबराहट नहीं, कोई अफरातफरी नहीं। तभी अचानक, एक कमजोर चींटी
फिसलकर वापस अंदर गिर गई।

और तभी मैंने वह देखा जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी।
आखिरी चींटी, जो पहले से सुरक्षित थी, पीछे मुड़ी। वह डूबने वाली चींटी की ओर वापस गई, मानो कह रही हो, "हिम्मत मत हारो, मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगी।"

उसने दूसरी चींटी को पकड़ा, लेकिन वह उसे अकेले नहीं उठा सकी।
इसलिए मैंने फिर से चम्मच नीचे किया — और वे दोनों सुरक्षित बाहर निकल आईं।
मैं वहां खामोश खड़ा रही।

मुझे अपनी पहली सोच पर शर्म महसूस हुई — कि वे स्वार्थी थीं। और मैं उस दृश्य से चकित थी
जो मैंने अभी देखा था: अनुशासन, लचीलापन, एकता और निस्वार्थ भाव। 

यदि इतने छोटे जीव ऐसी एकजुटता के साथ काम कर सकते हैं... तो हम इंसान अक्सर उन लोगों को अनदेखा क्यों कर देते हैं जिन्हें मदद की जरूरत होती है?





हम पुल बनाने के बजाय दीवारें क्यों खड़ी करते हैं?
उस सुबह, प्रकृति ने मुझे एक सरल लेकिन शक्तिशाली सबक सिखाया: 
सच्ची ताकत एकता में ही निहित है।


और अगर हम इस तरह जीना भूल गए हैं, 
तो शायद इसे फिर से सीखने का समय आ गया है — 
उन चीटियों से

सोमवार, 29 जून 2026

120 ,,गन्ने का जूस लगाना... पर सुनो, एकदम 'शुगर-फ्री' होना चाहिए

 


कल दोपहर भयंकर गर्मी में गन्ने के ठेले पर खड़ा होकर ₹30 वाला बड़ा ग्लास दबा रहा था। तभी वहाँ एक 'हाई-फाई डाइट कांशियस' मैडम अपनी चमचमाती गाड़ी से उतरीं। ठेले वाले से बोलीं—"भैया, एक गन्ने का जूस लगाना... पर सुनो, एकदम 'शुगर-फ्री' होना चाहिए!"

रविवार, 21 जून 2026

119 वास्कोडिगामा ने भारत आकर किस फल का सेवन किया कि उसके सारे घाव भर गए ?

 वास्कोडिगामा ने भारत आकर किस फल का सेवन किया कि उसके सारे घाव भर गए ?


यूरोप के लोगों को पता ही नहीं था कि भारत जैसा साधन संपन्न देश है, 1498 में पुर्तगाल के व्यापारी वास्कोडिगामा ने जहाज द्वारा अनेक स्थानों का भ्रमण किया जहां उसने भारत को पाया यात्रा के दौरान उसके शरीर में अनेक घाव हो गए थे जो अत्यधिक पीड़ा दे रहे थे और रक्त रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

केरल के कालीकट स्थान पर पहुंचने के बाद वास्कोडिगामा ने स्थानीय निवासियों से मुलाकात की जिन्होंने उसके घावों की मरहम पट्टी की और पपीते का सेवन करना शुरू किया कुछ ही दिनों में वास्कोडिगामा बिल्कुल ठीक हो गया उसने पपीते के बीज संग्रहित कर अपने देश ले गया। वास्कोडिगामा ने पपीते को "सुनहरा फल" कहकर संबोधित किया है।

मार्कोपोलो और उसके साथी कई दिनों से जहाज यात्रा पर सवार होकर नए देशों की खोज करने में लगे थे जिससे पोषक तत्वों की कमी के चलते हैं उन्हें स्कर्वी रोग से सामना करना पड़ा जिससे उनके मसूड़ों से खून रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था तब उन्हें किसी देश में पपीते का सेवन करवाया गया जिससे उनका स्कर्वी रोग ठीक हो गया।

अक्सर जब हमारे शरीर में प्लेटलेट्स की कमी होती है तो चिकित्सक हमें पपीते की पत्तियों का रस पीने की सलाह देता है और कुछ ही दिनों में हम ठीक हो जाते हैं उसी प्रकार पपीते के बीजों का प्रयोग भी औषधीय महत्व के लिए किया जाता है पपीता पेट की समस्याओं के लिए रामबाण सिद्ध है साथ ही विटामिन ए की खूबियों के कारण आंखों की रोशनी के लिए वरदान है। इसमें कैंसर को ठीक करने की भी खूबियां हैं।बुजुर्गों के गठिया की समस्या को दूर करता है। 

सबसे प्रमुख बात यह है कि सेवन किए गए फास्ट फूड पिज़्ज़ा, चाऊमीन, बर्गर, द्वारा निर्मित जहर को पेट से निष्कासित करने का काम करता है


कुल मिलाकर यह हमारे शरीर को कंप्यूटर की तरह रिफ्रेश कर देता है।
अतः हफ्ते में एक बार स्वयं, पत्नी, और बच्चों, बुजुर्गों को पपीते का सेवन जरूर करें और स्वस्थ रहें।


रविवार, 14 जून 2026

118 ...मिट्टी के पत्तल से सीधे 'मोक्ष का शॉर्टकट'


 'मोक्ष का शॉर्टकट'

 पेरिस, मॉस्को और नासा के वैज्ञानिकों के बनारस में संन्यास लेने के बाद, पूरी दुनिया की साइकोलॉजी और न्यूरो-साइंस इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। इस बार स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख से दुनिया के सबसे बड़े 'ब्रेन मैपिंग एक्सपर्ट' और 'ह्यूमन बिहेवियर साइंटिस्ट', डॉ. लुकास हॉफमैन, बनारस पहुंचे।


उनका मानना था कि इंसान का स्वाद और उसका मूड पूरी तरह से दिमाग के केमिकल लोचा (Neurological Circuits) से कंट्रोल होता है। वे अपने साथ एक पोर्टेबल न्यूरो-स्कैनर, ब्रेन-वेव ट्रैकर और जीभ की नसों को नापने वाला एक 'सेंसरी गन' लेकर आए थे। उनका इरादा था यह समझना कि आखिर बनारस का खाना लोगों के दिमाग को कैसे 'कंट्रोल' कर लेता है।


शाम के वक्त डॉ. लुकास गोदौलिया की एक बेहद भीड़भाड़ वाली चाट की दुकान के सामने जा खड़े हुए। वहां उन्होंने देखा कि एक आदमी हाथ में पत्तल लिए खड़ा है, और हलवाई अपनी उंगली से एक कड़क गोलगप्पे (पानीपुरी) में छेद करके, उसमें चोखा भर रहा है और फिर उसे तीखे-खट्टे पानी के ड्रम में डुबोकर सीधे उस आदमी के पत्तल में फेंक रहा है। लोग बिना चबाए, पूरा का पूरा गोलगप्पा मुंह में ठँस रहे हैं और उनकी आँखों से आंसू बह रहे हैं।



लुकास ने तुरंत अपना न्यूरो-स्कैनर चालू किया और हैरान होकर चिल्लाए— "Oh My God! इस लिक्विड का एसिडिक लेवल और क्रंच इंडेक्स इंसानी दिमाग की नसों को हिला रहा है! बिना किसी स्पून के, इस तरह सीधे हाथ से खाना साइंटिफिकली अनहाइजीनिक है, फिर भी इन लोगों का हैप्पी हॉर्मोन (Dopamine) इतनी तेज़ी से ऊपर कैसे भाग रहा है?"


तभी हलवाई ने मुस्कुराकर उनके हाथ में एक पत्तल थमा दी और बोला— "बाबू, मशीन किनारे रखो। पहले एक 'गोलगप्पा चापो', फिर बात करना।"


लुकास ने जैसे ही वह पानी से भरा गोलगप्पा मुंह में रखा, तीखे, खट्टे और पुदीने के पानी का एक ऐसा ब्लास्ट हुआ कि उनके दिमाग का न्यूरो-स्कैनर वहीं हैंग हो गया। उनकी आँखें पूरी खुल गईं और उनके कान लाल हो गए।


अभी वे संभल भी नहीं पाए थे कि हलवाई ने उनके पत्तल में गरमा-गरम, कड़क 'आलू टिक्की चाट' रख दी, जिसके ऊपर गाढ़ी दही, सोंठ की मीठी चटनी और हरी मिर्च का तड़का लगा था। उसके तुरंत बाद, हलवाई ने एक समोसे को हाथ से फोड़कर, उसके ऊपर छौंकी हुई मटर और ढेर सारे मसाले डालकर 'समोसा चाट' भी परोस दी।



क्रंची गोलगप्पे का तीखापन, आलू टिक्की का सोंधा-मक्खन जैसा स्वाद, और समोसा चाट की खट्टी-मीठी गरम मिठास— इन तीनों के कॉम्बिनेशन ने लुकास के दिमाग के सारे न्यूरोलॉजिकल फॉर्मूले और साइकोलॉजी की थ्योरीज़ को एक झटके में डिलीट कर दिया। वे अपनी सेंसरी गन वहीं काउंटर पर छोड़कर, उंगलियों से पत्तल चाटने लगे।


उन्होंने अपने स्विस टैबलेट पर तुरंत नोट लिखा— "रिसर्च अपडेट: स्विट्ज़रलैंड में हम इंसानी दिमाग को शांत करने के लिए थेरेपी और दवाइयाँ देते हैं, लेकिन बनारस में 'गोलगप्पे और चाट' का यह कॉम्बिनेशन दिमाग के सारे तनाव को एक सेकंड में धो देता है। इस स्वाद में कोई मेडिकल कैलकुलेशन नहीं है, यह तो सीधे आत्मा को रिबूट करने का तरीका है।"


रात होते-होते डॉ. लुकास दुकान के बगल में नाली के किनारे कबाड़ के बेंच पर बैठ गए। उन्होंने देखा कि चाट खाने के बाद हर इंसान ऐसे मुस्कुरा रहा है जैसे उसे दुनिया का सबसे बड़ा खज़ाना मिल गया हो।



लुकास ने अपनी लाख डॉलर की ब्रेन-मैपिंग मशीन को गंगा जी में विसर्जित कर दिया और गहरी सांस लेकर बोले— "यूरोप की सारी न्यूरो-साइंस इस कड़ाही और पानी के ड्रम के सामने घुटने टेक चुकी है। हम वहां लैब में खुशी ढूंढते हैं, यहाँ तो मिट्टी के पत्तल से सीधे 'मोक्ष का शॉर्टकट' मिल रहा है।"


रात को डॉ. लुकास हॉफमैन ने ज़्यूरिख की अपनी यूनिवर्सिटी को एक छोटा सा ईमेल भेजा: "क्लिनिक तुरंत बंद कर दो! सारे न्यूरो-स्कैनर और थेरेपी मशीनें कबाड़ में बेच दो। मैंने जिंदगी भर इंसानी दिमाग को मापा, पर असली मानसिक शांति तो बनारस के इस तीखे गोलगप्पे और समोसा चाट में है। यहाँ पेट नहीं भरता, यहाँ इंसान का 'अहंकार' पिघल जाता है। मैं अब स्विट्ज़रलैंड वापस नहीं आ रहा!"


अगले दिन सुबह, अस्सी घाट की सीढ़ियों पर अब ग्यारह विदेशी बैठे थे। पुराने सभी वैज्ञानिकों के बीच अब स्विट्ज़रलैंड के डॉ. लुकास भी भगवा कुर्ता पहने, हाथ में चाय का कुल्हड़ लिए बैठे थे। लुकास साहब ज़ोर से चिल्लाए: "एलन साहब! निकोलाई साहब! अपनी साइंस और लैब को यूरोप की ट्रेनों में ही छोड़ आओ... यहाँ आओ, पहले दो पत्तल आलू टिक्की चापो... मोक्ष यहाँ चाट की दुकान पर पत्तल बिछाए खड़ा है...

-संकलन

गुरुवार, 21 मई 2026

117 ..भरता नहीं मन। भरता ही नहीं; मन का वह स्वभाव नहीं है

चंदूलाल विश्व-प्रतियोगिता-फेम एक दिन घबड़ाए हुए डाक्टर के यहां पहुंचे और बोले, डाक्टर साहब, आजकल मुझे भूख नहीं लगती।
डाक्टर ने पूछा, आज सबेरे से क्या खाया?
चंदूलाल बोले, सबेरे बिस्तर पर वही कोई दस कप चाय पी और चाय के साथ दस-पंद्रह प्लेट जलेबियां। फिर हाथ-मुंह धोकर बाजार गया। वहां कोई पंद्रह प्लेट समोसे और कोई छह गिलास दूध पीया। फिर शहर का एक चक्कर मारा, तब तक ग्यारह बज चुके थे और भोजन का समय भी हो चुका था, सो घर पहुंचा। वहां बीस रोटियां और दस प्लेट चावल और कोई दस संतरे खाए, और…
डाक्टर बीच में ही टोकते हुए बोला, तो क्या अब मुझे खाने का इरादा है?
भरता नहीं मन। भरता ही नहीं; मन का वह स्वभाव नहीं है।
तो एक तरफ परिग्रह वाले लोग हैं, जो इकट्ठा करते चले जाते हैं। फिर इकट्ठा करते-करते थक जाते हैं, बुरी तरह थक जाते हैं। थक जाते हैं तो उलटा करने लगते हैं। सोचते हैं परिग्रह से तृप्ति नहीं मिली तो त्याग से मिलेगी। पहले धन इकट्ठा करते थे, अब धन छोड़ कर भागते हैं। पहले स्त्रियों के पीछे भागते थे; अब स्त्रियां देखीं कि एकदम भागते हैं, उनकी तरफ पीठ करके भागते हैं। जो-जो पहले किया था उससे उलटा करने लगते हैं। जैसे कोई आदमी सोचता हो कि शीर्षासन करेंगे तो जीवन रूपांतरित हो जाएगा।
लेकिन मनुष्य के जीवन का एक तर्क है–एक काम करके जब थक जाता है तो तत्क्षण दूसरी अति पर चला जाता है। स्वभावतः उसे लगता है ऐसा करने से नहीं हुआ, इससे विपरीत करके देख लूं। इसलिए भोगी हैं, परिग्रही हैं और त्यागी हैं।
और तुम यह चकित होओगे जान कर: जितना भोगी समाज हो उतना ही उसमें त्यागियों का आदर होता है। क्योंकि भोगी को त्याग का तर्क समझ में आता है। उसके मन में भी लग रहा है कि कुछ मिल तो रहा नहीं है, इकट्ठा तो कर रहा हूं, कुछ मिल तो रहा नहीं है। अभी अपनी सामर्थ्य कम है, आत्मबल कम है, संकल्प कम है। जब संकल्प होगा तो हम भी त्याग कर और मुनि हो जाएंगे।
साक्षी-भाव उसका नाम, साक्षी-भाव उसका स्वरूप। संग्रह में भी कर्ता आ जाता है और त्याग में भी कर्ता आ जाता है। और जहां कर्ता आ गया वहां संसार आ गया। कर्ता यानी संसार का द्वार।जहां भी होओ–चाहे संसार में और चाहे संसार के बाहर, चाहे त्यागी होओ चाहे भोगी–एक बात खयाल रखना: कर्ता-भाव न आए। जहां कर्ता-भाव आया, वहीं चूक हो गई, वहीं फिसले, बुरे फिसले। साक्षी-भाव बना रहे। दुकान पर भी बैठ कर अगर साक्षी-भाव बना रहे, बाजार में भी बैठ कर अगर तुम सिर्फ दर्शक मात्र रहो–तो पर्याप्त।
बस यह साक्षी-भाव सतत बहने लगे, चौबीस घंटे बहने लगे, सपने में भी बना रहे, सपने में भी दिखाई पड़ता रहे कि मैं साक्षी हूं–फिर तुम्हारे ऊपर कोई कालिख न रह जाएगी, कोई कलुष न रह जाएगा, कोई कल्मष न रह जाएगा। तुम परम शुद्ध परमात्मा को अनुभव कर लोगे! वह तुम्हारे भीतर विराजमान है, एक क्षण को भी वहां से हटा नहीं है।
- भगवान श्री रजनीश

गुरुवार, 14 मई 2026

116 रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं

 रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो 
पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं ।

यहाँ शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ रोटी हैं

1. अफगानिस्तान

पारंपरिक बोलानी रोटी, अफगानिस्तान.

तंदूर ओवन में पकी अफगानिस्तान की बोलानी रोटी ;

बोलानी रोटी बहुत पतली परत होती है औरबिच में कई प्रकार की सामग्री भरी जाती है ,
जैसे कि आलू, पालक, दाल, कद्दू या लौकी;

2. अंगोला

अंगोला में यह बेकरी चेक गणराज्य ने तौहफे में दी है।
सफेद ब्रेड आपको यूरोपियन बैगूलेट्स की याद दिलाएंगे।



3. ऑस्ट्रेलिया


पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई पनीर दमपर रोटी

स्ट्रीक पर पकाई जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई डम्पर रोटी


4. ऑस्ट्रिया

सनफलोवेर ब्रेड जो ऑस्ट्रियाई की ग्रीष्मकालीन सैंडविच के रूप में जाना जाता है .


चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में भी सफेद आटे से बनते है ऑस्ट्रियन ब्रेड रोल

5. चेक गणराज्य

Umava जो चेक गणराज्य के दक्षिण में एक क्षेत्र है 
वहा की उसी नामक पारंपरिक चेक ब्रेड ,
गहरे आटे ( राई और गेहूं के फूल) से बनी हुयी:


6. डोमिनिकन गणराज्य

डोमिनिकन गणराज्य के पहाड़ी क्षेत्रों की 
मकई की रोटी ये 10 किलो का भारी पाव.

ये जानकारी कोरा से प्राप्त हुइ है

मंगलवार, 12 मई 2026

115 ..कौमी एकता का ठेका तो हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।



अजमेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ थी कि
 
वहां की कोई बेंच खाली नहीं थी। 

एक बेंच पर एक परिवार, जो पहनावे से हिन्दू लग रहा था,
 
के साथ बुर्के में एक अधेड़ सुसभ्य महिला बैठी थी। 

उसने सभ्यता से पान की पीक थूक-2 कर प्लेटफार्म 

पर अपने आस-पास कई चित्र बना दिये थे। 

बहुत देर चुपचाप बैठने के बाद जब उससे चुप्पी बर्दाश्त न हुई तो 

उसने बगल में बैठे युवक से पूछा,

 "अजमेर के रहने वाले हैं या फिर यहाँ घूमने आये हैं?"

युवक ने बताया, "जी अपने माता पिता के साथ

पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के दर्शन करने आया था।"

महिला ने बुरा मुँह बनाते हुए फिर पूछा,"आप लोग अजमेर शरीफ की दरगाह पर नहीं गए?"

युवक ने उस महिला से प्रति उत्तर कर दिया, "क्या आप ब्रह्मा जी के मंदिर गई थीं?"

महिला अपने मुँह को और बुरा बनाते हुए बोली,

"लाहौल विला कुव्वत। इस्लाम में बुतपरस्ती हराम है और 

आप पूछ रहे हैं कि ब्रह्मा के मंदिर में गई थी।"

युवक झल्लाकर बोला,
"जब आप ब्रह्मा जी के मंदिर में जाना हराम मानती हैं
तो हम क्यों अजमेर शरीफ की 
दरगाह पर जाकर अपना माथा फोड़ें।"
महिला युवक की माँ से शिकायती लहजे में बोली, 
"देखिये बहन जी। आपका लड़का तो बड़ा बदतमीज है। 
ऐसी मजहबी कट्टरता की वजह से ही तो हमारी कौमी एकता में फूट पड़ती है।"
युवक की माँ मुस्कुराते हुए बोली, 

"ठीक कहा बहन जी।
कौमी एकता का ठेका तो
हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।

साभार- हर्षवर्धन आर्य


सोमवार, 4 मई 2026

114 ..'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'

 भारत में मैं कई राजनेताओं को जानता हूँ, 
किन्तु मैंने उनमें दिमाग नहीं पाया।

    जिन सामान्य बातों को कोई भी समझ सकता है, जिन्हें समझने के लिए किसी महान प्रतिभा की जरूरत नहीं है, उन्हें भी राजनेता समझ नहीं पाते । मेरा एक मित्र भारतीय सेना का कमांडर इन चीफ था। उनका नाम था जनरल चौधरी | जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, तो इस आदमी ने प्रधान मंत्री से हमले का मुकाबला करने की अनुमति मांगी | उसने कहा कि इस समय सिर्फ रक्षात्मक होने से कुछ नहीं होगा क्योंकि यदि आप रक्षात्मक हैं तो इसका अर्थ है, आप पहले ही हार गए हैं | यह एक सरल सैन्य रणनीति है कि बचाव का सबसे अच्छा तरीका आक्रामक होना है |
    चौधरी का सुझाव था कि अगर पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर हमला किया है, तो हमें पाकिस्तान पर चार –पांच मोर्चों से आक्रमण करना चाहिए। वे घबरा जायंगे और समझ नहीं पायेंगे कि वे अपनी सेना कहाँ भेजें। उन्हें अपने देश की पूरी सीमा का बचाव करना होगा, तो उनका हमला अपने आप विफल हो जाएगा ।
    लेकिन उफ़ ये राजनेता ! प्रधान मंत्री नेहरू ने उन्हें कहा कि सुबह तक 6 बजे तक इंतजार करो।
जनरल चौधरी ने मुझे बताया कि उसके बाद उन्हें सेना से निकाल दिया गया था – लेकिन यह बात सार्वजनिक नहीं की गई ।
सार्वजनिक रूप से तो वे ससम्मान सेवानिवृत्त हुए, लेकिन सचाई यह है कि उन्हें निकाला गया था | उनसे कहा गया था - 'या तो आप इस्तीफा दें या हम आपको बाहर निकाल देंगे।'
अपराध क्या था उनका ? उनका अपराध यह था कि उन्होंने छः बजे के स्थान पर सुबह 5 बजे पाकिस्तान पर हमला कर दिया । क्योंकि उनकी नजर में यही सही समय था, छः बजे तो सूर्योदय हो जाएगा, लोग जाग जायेंगे। सुबह पांच बजे का समय एकदम उपयुक्त था - सब लोग सो रहे थे – वे लोग हक्के बक्के हो गए । और उसने जैसा कहा था, बैसा ही हुआ - उसने पूरे पाकिस्तान को थरथरा दिया । देखते ही देखते भारतीय सेनायें पाकिस्तान से सबसे बड़े शहर लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर रह गईं |
तब तक राजनेता क्या कर रहे थे ? पूरी रात नेहरू और उनकी कैबिनेट विचार विमर्श में उलझी रही - ऐसा करने का क्या नतीजा होगा, बैसा करने से क्या होगा और सुबह 6 बजे तक भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए । तभी उन्होंने रेडियो पर सुना - 'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
यह स्थिति राजनेताओं के लिए असहनीय थी | उन्होंने लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर उन्हें रोक दिया और जहाँ तक मैं समझता हूँ, यह मूर्खता की पराकाष्ठा थी | यदि उस दिन लाहौर जीत लिया जाता, कश्मीर की समस्या और भारत का सरदर्द हमेशा के लिए हल हो गया होता। कश्मीर के उस क्षेत्र की समस्या अब कभी हल नहीं हो सकती, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है - और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जनरल चौधरी को वापस आने के लिए कहा गया | कहा गया कि भारत एक अहिंसक देश है और आपने आदेश का इंतजार नहीं किया ।
    उन्होंने प्रधान मंत्री से साफ़ शब्दों में कहा - सैन्य रणनीतियों को मैं समझता हूं, आप नहीं  आप छः बजे की बात करते हैं, पर उस समय भी आपका ऑर्डर कहाँ था? पाकिस्तान ने पहले ही कश्मीर के सबसे सुंदर हिस्से पर कब्जा कर लिया था - और आप पूरी रात चर्चा ही करते रहे । यह चर्चा का समय नहीं था - युद्ध के मैदान पर फैसला किया जाना चाहिए था । अगर आपने मुझे लाहौर में जाने की अनुमति दी होती तो हम सौदेबाजी की स्थिति में होंते । अब हम सौदेबाजी की स्थिति में नहीं हैं। आपने मुझे वापस बुला लिया और मुझे वापस आना पड़ा। '
    संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम लाइन का निर्णय किया । तो अब वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सेनाएं वहां गश्त कर रही हैं, दूसरी ओर पाकिस्तानी सेनाएं गश्त कर रही हैं, इस तरफ भारतीय सेनाएं गश्त कर रही हैं। वर्षों से सिर्फ बकवास हो रही है ! और वे संयुक्त राष्ट्र में गए, जहाँ सिर्फ चर्चा होती है, और नतीजा वही ढाक के तीन पात ।और पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए क्षेत्र को आप युद्ध विराम के कारण वापस नहीं ले सकते। उन्होंने अपनी संसद में फैसला किया है कि उनके द्वारा कब्ज़ा किया गया क्षेत्र पाकिस्तान का अभिन्न अंग है । अब वे इसे अपने नक्शे पर दिखाते हैं। अब यह क्षेत्र कब्जाया हुआ नहीं, पाकिस्तानी क्षेत्र है।
मैंने जनरल चौधरी से कहा था- 'यह एक साधारण सी बात थी कि आपको सौदेबाजी की स्थिति में होना चाहिए था। यदि आपने लाहौर ले लिया होता, तो वे कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते | क्योंकि वे लाहौर खोना बर्दास्त नहीं कर सकते थे। उसके बाद अगर कोई संघर्ष विराम होता भी तो सौदेबाजी करते समय लाहौर हमारे पास होता । अब सौदेबाजी के लिए भारत के पास क्या है ? पाकिस्तान को क्या परेशानी? '
लेकिन राजनेताओं में दिमाग होता ही कहाँ हैं? "
     प्रवचन-२८,ओशो

अंधेरे से उजाले की ओर