किसी के इतने पास न जा
गुरुवार, 21 मई 2026
117 ..भरता नहीं मन। भरता ही नहीं; मन का वह स्वभाव नहीं है
गुरुवार, 14 मई 2026
116 रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं
रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो
पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं ।
यहाँ शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ रोटी हैं
1. अफगानिस्तान
पारंपरिक बोलानी रोटी, अफगानिस्तान.
तंदूर ओवन में पकी अफगानिस्तान की बोलानी रोटी ;
बोलानी रोटी बहुत पतली परत होती है औरबिच में कई प्रकार की सामग्री भरी जाती है ,
जैसे कि आलू, पालक, दाल, कद्दू या लौकी;
2. अंगोला
अंगोला में यह बेकरी चेक गणराज्य ने तौहफे में दी है।
सफेद ब्रेड आपको यूरोपियन बैगूलेट्स की याद दिलाएंगे।
पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई पनीर दमपर रोटी
स्ट्रीक पर पकाई जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई डम्पर रोटी
4. ऑस्ट्रिया
सनफलोवेर ब्रेड जो ऑस्ट्रियाई की ग्रीष्मकालीन सैंडविच के रूप में जाना जाता है .
चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में भी सफेद आटे से बनते है ऑस्ट्रियन ब्रेड रोल
5. चेक गणराज्य
Umava जो चेक गणराज्य के दक्षिण में एक क्षेत्र है
वहा की उसी नामक पारंपरिक चेक ब्रेड ,
गहरे आटे ( राई और गेहूं के फूल) से बनी हुयी:
6. डोमिनिकन गणराज्य
डोमिनिकन गणराज्य के पहाड़ी क्षेत्रों की
मकई की रोटी ये 10 किलो का भारी पाव.
ये जानकारी कोरा से प्राप्त हुइ है
मंगलवार, 12 मई 2026
115 ..कौमी एकता का ठेका तो हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।
पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के दर्शन करने आया था।"
"लाहौल विला कुव्वत। इस्लाम में बुतपरस्ती हराम है और
"जब आप ब्रह्मा जी के मंदिर में जाना हराम मानती हैं
तो हम क्यों अजमेर शरीफ की
कौमी एकता का ठेका तो
हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।
सोमवार, 4 मई 2026
114 ..'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
भारत में मैं कई राजनेताओं को जानता हूँ,
किन्तु मैंने उनमें दिमाग नहीं पाया।
चौधरी का सुझाव था कि अगर पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर हमला किया है, तो हमें पाकिस्तान पर चार –पांच मोर्चों से आक्रमण करना चाहिए। वे घबरा जायंगे और समझ नहीं पायेंगे कि वे अपनी सेना कहाँ भेजें। उन्हें अपने देश की पूरी सीमा का बचाव करना होगा, तो उनका हमला अपने आप विफल हो जाएगा ।
लेकिन उफ़ ये राजनेता ! प्रधान मंत्री नेहरू ने उन्हें कहा कि सुबह तक 6 बजे तक इंतजार करो।
जनरल चौधरी ने मुझे बताया कि उसके बाद उन्हें सेना से निकाल दिया गया था – लेकिन यह बात सार्वजनिक नहीं की गई ।
सार्वजनिक रूप से तो वे ससम्मान सेवानिवृत्त हुए, लेकिन सचाई यह है कि उन्हें निकाला गया था | उनसे कहा गया था - 'या तो आप इस्तीफा दें या हम आपको बाहर निकाल देंगे।'
अपराध क्या था उनका ? उनका अपराध यह था कि उन्होंने छः बजे के स्थान पर सुबह 5 बजे पाकिस्तान पर हमला कर दिया । क्योंकि उनकी नजर में यही सही समय था, छः बजे तो सूर्योदय हो जाएगा, लोग जाग जायेंगे। सुबह पांच बजे का समय एकदम उपयुक्त था - सब लोग सो रहे थे – वे लोग हक्के बक्के हो गए । और उसने जैसा कहा था, बैसा ही हुआ - उसने पूरे पाकिस्तान को थरथरा दिया । देखते ही देखते भारतीय सेनायें पाकिस्तान से सबसे बड़े शहर लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर रह गईं |
तब तक राजनेता क्या कर रहे थे ? पूरी रात नेहरू और उनकी कैबिनेट विचार विमर्श में उलझी रही - ऐसा करने का क्या नतीजा होगा, बैसा करने से क्या होगा और सुबह 6 बजे तक भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए । तभी उन्होंने रेडियो पर सुना - 'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
यह स्थिति राजनेताओं के लिए असहनीय थी | उन्होंने लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर उन्हें रोक दिया और जहाँ तक मैं समझता हूँ, यह मूर्खता की पराकाष्ठा थी | यदि उस दिन लाहौर जीत लिया जाता, कश्मीर की समस्या और भारत का सरदर्द हमेशा के लिए हल हो गया होता। कश्मीर के उस क्षेत्र की समस्या अब कभी हल नहीं हो सकती, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है - और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जनरल चौधरी को वापस आने के लिए कहा गया | कहा गया कि भारत एक अहिंसक देश है और आपने आदेश का इंतजार नहीं किया ।
उन्होंने प्रधान मंत्री से साफ़ शब्दों में कहा - सैन्य रणनीतियों को मैं समझता हूं, आप नहीं आप छः बजे की बात करते हैं, पर उस समय भी आपका ऑर्डर कहाँ था? पाकिस्तान ने पहले ही कश्मीर के सबसे सुंदर हिस्से पर कब्जा कर लिया था - और आप पूरी रात चर्चा ही करते रहे । यह चर्चा का समय नहीं था - युद्ध के मैदान पर फैसला किया जाना चाहिए था । अगर आपने मुझे लाहौर में जाने की अनुमति दी होती तो हम सौदेबाजी की स्थिति में होंते । अब हम सौदेबाजी की स्थिति में नहीं हैं। आपने मुझे वापस बुला लिया और मुझे वापस आना पड़ा। '
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम लाइन का निर्णय किया । तो अब वर्षों से संयुक्त राष्ट्र सेनाएं वहां गश्त कर रही हैं, दूसरी ओर पाकिस्तानी सेनाएं गश्त कर रही हैं, इस तरफ भारतीय सेनाएं गश्त कर रही हैं। वर्षों से सिर्फ बकवास हो रही है ! और वे संयुक्त राष्ट्र में गए, जहाँ सिर्फ चर्चा होती है, और नतीजा वही ढाक के तीन पात ।और पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए क्षेत्र को आप युद्ध विराम के कारण वापस नहीं ले सकते। उन्होंने अपनी संसद में फैसला किया है कि उनके द्वारा कब्ज़ा किया गया क्षेत्र पाकिस्तान का अभिन्न अंग है । अब वे इसे अपने नक्शे पर दिखाते हैं। अब यह क्षेत्र कब्जाया हुआ नहीं, पाकिस्तानी क्षेत्र है।
मैंने जनरल चौधरी से कहा था- 'यह एक साधारण सी बात थी कि आपको सौदेबाजी की स्थिति में होना चाहिए था। यदि आपने लाहौर ले लिया होता, तो वे कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते | क्योंकि वे लाहौर खोना बर्दास्त नहीं कर सकते थे। उसके बाद अगर कोई संघर्ष विराम होता भी तो सौदेबाजी करते समय लाहौर हमारे पास होता । अब सौदेबाजी के लिए भारत के पास क्या है ? पाकिस्तान को क्या परेशानी? '
लेकिन राजनेताओं में दिमाग होता ही कहाँ हैं? "
प्रवचन-२८,ओशो
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
113 आत्मविश्वास हो तो सर्व कार्य सफल
एक नर्स लंदन में ऑपरेशन से दो घंटे पहले मरीज़ के कमरे में घुसकर कमरे को ठीक करने में और वहां रखे गुलदस्ते को संवारने में लगी थी।
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
112 ..हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए
अध्यापिका ने कहा, "पहले एक कहानी सुनाती हूं।" उसने कहा, "एक महिला को बेटे की लालसा में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसे धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छा अनुसार बेटा पैदा कर दे। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो-रोकर दुआ करती रही...!!
अध्यापिका ने आगे कहा, "दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया, लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। रोज़ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझ कर शांत हो गया। फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उन्हें बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई। यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनिया से चली जाती...!!
सोमवार, 20 अप्रैल 2026
111 ..चीनी भाषा दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है
स्वामी रामतीर्थ जापान गए। जिस जहाज पर वह थे, एक नब्बे वर्ष का जर्मन बूढ़ा चीनी भाषा सीख रहा था। अब चीनी भाषा सीखनी बहुत कठिन बात है। शायद मनुष्य की जितनी भाषाएं हैं, उनमें सबसे ज्यादा कठिन बात है। क्योंकि चीनी भाषा के कोई वर्णाक्षर नहीं होते, कोई क ख ग नहीं होता। वह तो चित्रों की भाषा है। इतने चित्रों को सीखना नब्बे वर्ष की उम्र में! अंदाजन किसी भी आदमी को दस वर्ष लग जाते हैं ठीक से चीनी भाषा सीखने में।





