शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

112 ..हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए

हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए 


लड़कियों के एक विद्यालय में नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी, लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी। सभी छात्राएं उसे देखकर तरह-तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं, तो एक छात्रा ने बातों-बातों में ही उससे पूछ लिया, "मैडम, आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की?...??


अध्यापिका ने कहा, "पहले एक कहानी सुनाती हूं।" उसने कहा, "एक महिला को बेटे की लालसा में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं। जब छठवीं बार वह गर्भवती हुई तो पति ने उसे धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा। महिला अकेले में रोती हुई भगवान से प्रार्थना करने लगी, क्योंकि यह उसके वश की बात नहीं थी कि अपनी इच्छा अनुसार बेटा पैदा कर दे। इस बार भी बेटी ही पैदा हुई। पति ने नवजात बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया। मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए रो-रोकर दुआ करती रही...!!

अध्यापिका ने आगे कहा, "दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया, लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। रोज़ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझ कर शांत हो गया। फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उन्हें बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई। यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनिया से चली जाती...!!

अध्यापिका की आंखों से आंसू गिरने लगे थे। उसने आंसू पोंछकर आगे कहना शुरू किया, "अब सिर्फ एक ही बेटी जिंदा बची थी और वह वही बेटी थी, जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था। एक दिन अचानक मां भी इस दुनियां से चली गई। इधर पांच बेटे और एक बेटी सब धीरे-धीरे बड़े हो गए...!!अध्यापिका ने फिर कहा, "पता है वह बेटी जो ज़िंदा बची रही, मैं ही हूं। मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता अब इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और अब घर में और कोई नहीं है जो उनकी सेवा कर सके। बस मैं ही उनकी सेवा और देखभाल किया करती हूं। 

जिन बेटों के लिए पिताजी परेशान थे, वो पांच बेटे अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहते हैं। बस कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं।"वह थोड़ा मुस्कराई। फिर बोली, "मेरे पिताजी अब हर दिन शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझसे कहा करते हैं, 'मेरी प्यारी बेटी, जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ कर देना...!!अध्यापिका की कहानी सुनकर सभी छात्राएं भावुक हो गईं। यह कहानी हमें सिखाती है कि बेटी की ममता और त्याग अद्वितीय है। एक बेटी अपने पिता के लिए सब कुछ कर सकती है, सिर्फ इसलिए कि वह अपने पिता को खुश देख सके...!!

एक पिता बेटे के साथ खेल रहा था। बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए वह जानबूझकर हार जा रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपटकर रोते हुए बोली, "पापा! आप मेरे साथ खेलिए, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूं...!!

इस कहानी में निहित संदेश यह है कि बेटियों की ममता और प्यार का कोई मुकाबला नहीं है। 
वे अपने माता-पिता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। 
हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए और उनके प्यार और त्याग को समझना चाहिए...!!
अध्यापिका ने आगे कहा, "दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक पर बेटी को देखने पहुंचा तो देखा कि बच्ची वहीं पड़ी है। 
उसे जीवित रखने के लिए बाप बेटी को वापस घर लाया, लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को उसी चौक पर रख आया। 
रोज़ यही होता रहा। हर बार पिता उस नवजात बेटी को बाहर रख आता और जब कोई उसे लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता। 
यहां तक कि उसका पिता एक दिन थक गया और भगवान की इच्छा समझ कर शांत हो गया।
 
फिर एक वर्ष बाद मां जब फिर से गर्भवती हुई तो इस बार उन्हें बेटा हुआ। लेकिन कुछ ही दिन बाद ही छह बेटियों में से एक बेटी की मौत हो गई। यहां तक कि माँ पांच बार गर्भवती हुई और हर बार बेटे ही हुए। लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक बेटी इस दुनिया से चली जाती...!!
अध्यापिका की आंखों से आंसू गिरने लगे थे। उसने आँसू पोंछकर आगे कहना शुरू किया, "अब सिर्फ एक ही बेटी जिंदा बची थी और वह वही बेटी थी, जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था। एक दिन अचानक मां भी इस दुनिया से चली गई। इधर पांच बेटे और एक बेटी सब धीरे-धीरे बड़े हो गए...!!
अध्यापिका ने फिर कहा, "पता है वह बेटी जो ज़िंदा बची रही, मैं ही हूं। मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता अब इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और अब घर में और कोई नहीं है जो उनकी सेवा कर सके। बस मैं ही उनकी सेवा और देखभाल किया करती हूं। 
जिन बेटों के लिए पिताजी परेशान थे, वो पांच बेटे अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहते हैं। बस कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं।"वह थोड़ा मुस्कराई। फिर बोली, "मेरे पिताजी अब हर दिन शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझसे कहा करते हैं, 
'मेरी प्यारी बेटी, जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ कर देना...!!

अध्यापिका की कहानी सुनकर सभी छात्राएं भावुक हो गईं। यह कहानी हमें सिखाती है कि बेटी की ममता और त्याग अद्वितीय है। एक बेटी अपने पिता के लिए सब कुछ कर सकती है, 
सिर्फ इसलिए कि वह अपने पिता को खुश देख सके...!!एक पिता बेटे के साथ खेल रहा था। बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए वह जानबूझकर हार जा रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपटकर रोते हुए बोली, 

"पापा! आप मेरे साथ खेलिए, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूं...!!इस कहानी में निहित संदेश यह है कि बेटियों की ममता और प्यार का कोई मुकाबला नहीं है। वे अपने माता-पिता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। 

हमें अपनी बेटियों की कद्र करनी चाहिए 
और उनके प्यार और त्याग को समझना चाहिए...!!!!!
-पूजा मिश्रा

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

111 ..चीनी भाषा दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है


स्वामी रामतीर्थ  जापान गए। जिस जहाज पर वह थे, एक नब्बे वर्ष का जर्मन बूढ़ा चीनी भाषा सीख रहा था। अब चीनी भाषा सीखनी बहुत कठिन बात है। शायद मनुष्य की जितनी भाषाएं हैं, उनमें सबसे ज्यादा कठिन बात है। क्योंकि चीनी भाषा के कोई वर्णाक्षर नहीं होते, कोई क ख ग नहीं होता। वह तो चित्रों की भाषा है। इतने चित्रों को सीखना नब्बे वर्ष की उम्र में! अंदाजन किसी भी आदमी को दस वर्ष लग जाते हैं ठीक से चीनी भाषा सीखने में।

चीनी भाषा (विशेषकर मंदारिन) 
दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा बोली जाने 
वाली भाषाओं में से एक है, 
जिसके 1 अरब से अधिक भाषी हैं। 
यह एक टोनल (स्वर-आधारित) भाषा है

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

110 .. इंदौर में पुंगनूर गाय का एक जोड़ा है

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले पुंगनूर नस्ल की गायों को चारा खिलाते हुए तस्वीर पोस्ट की थी। साथ ही उन्हें दुलारते भी दिखे थे। मध्य प्रदेश के इंदौर में पुंगनूर नस्ल की गाय एक दूध व्यापारी के पास है। अब फिर से उनके गायों की चर्चा शुरू हो गई है। साथ ही उसके गाय के बारे में जानने की उत्सुकता भी बढ़ गई है। इंदौर में पुंगनूर गाय का एक जोड़ा है, जिसे यहां के दूध व्यापारी आंध्र प्रदेश से खरीदकर लाए थे। आइए आपको इस गाय की खासियत बताते हैं। 

दरअसल, पुंगनूर एक दुर्लभ प्रजाति की गाय है, इस गाय का नाम आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के शहर पुंगनूर पर रखा गया है। पुंगनूर गाय सफेद और हल्के भूरे रंग की होती है। जिनका माथा काफी चौड़ा और सींग छोटे होते हैं। पुंगनूर गाय की औसत ऊंचाई ढाई फीट से तीन फीट के बीच होती है। वहीं, इस गाय का अधिकतम वजन 105 से 200 किलोग्राम तक होता है।  

इनके दूध में कई औषधीय गुण भी होते हैं। इन गायों का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। पुंगनूर गाय के दूध की खास बात यह है कि इसमें 8 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है। जबकि अन्य गाय के दूध में फैट केवल 3 से 5 प्रतिशत ही फैट होता है। इसके अलावा पुंगनूर गाय के मूत्र के अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल आंध्र प्रदेश के किसान फसलों पर छिड़काव के लिए करते हैं।  



वहीं, इस जोड़े को एक दूध व्यापारी सत्तू शर्मा ने एक साल पहले आंध्र प्रदेश के चित्तूर से खरीदकर इंदौर लाए है। तभी से ये गाय क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र है। महज ढाई फीट हाइट वाली यह दुनिया की सबसे छोटी गाय है। सत्तू शर्मा के मुताबिक पुंगनूर प्रजाति की गाय मध्य प्रदेश आने वाली संभवत: पहली गाय है। उन्होंने नवभारत टाइम्स.कॉम से बातचीत में कहा कि इसके दूध में स्वर्ण होता है।  



शर्मा ने बताया की दुनियाभर में मशहूर भगवान तिरुपति बालाजी का अभिषेक और प्रसाद इसी नस्ल के दूध से होता रहा है। ये देश में विलुप्त होती नस्लों में शामिल है। देश में इन गायों की संख्या सिर्फ 1000 के आसपास ही रह गई है।  

पुंगनूर गाय आपको एक लाख रुपए से लेकर 25 लाख रुपए तक की कीमत पर मिल जाती है। हालांकि इंदौर के व्यापारी ने कहा कि हमारे पास जो गाय है, उसकी कीमत 5-10 लाख रुपए तक है। ये भी माना जाता जाता है कि पुंगनूर गाय की आयु  जितनी कम होगी, उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी। कम संख्या होने की वजह से इसकी कीमत अधिक है।  

-सौजन्य गूगल जी

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

109 " तलाक के कागजों का क्या होगा..???

 तलाक होने के बाद पति कोर्ट से निकल कर ऑटो मे बैठा तो तलाकसुदा पत्नी रौनक भी उसी ऑटो मे बैठ गई..???उदास पति ने एक कातर दृष्टि से दस साल साथ रही पत्नी रौनक की तरफ देखा " वह बुझी मुस्कान के साथ बोली " बस अड्डे तक आखरी सफर आपके साथ करना चाहती हूँ।पति बोला " एलिमनी की रकम दो से तीन महीने मे दे दूंगा। घर बेच दूंगा।  तेरे लिए बनाया था। तू ही जिंदगी मे नही रही तो घर  का क्या करूँगा। ।


"रौनक जल्दबाजी मे बोली " घर मत बेचना। मुझे पैसे नही चाहिए। प्राइवेट जॉब करने लगी हूँ 
मेरा और मुन्ने का गुजारा हो जाता है। " अचानक ऑटो वाले ने ब्रेक मारे तो  पत्नी रौनक का मुँह सामने की रेलिंग से टकराने वाला था कि पति ने झटके से उसकी बांह पकड़ कर रोक लिया। 
वह पति की आँखों मे देखते हुए भरी आँखों से बोली 
"अलग हो गए मगर परवाह करने की आदत नही गई आपकी।" 

वह कुछ नही बोला। मगर वह रोने लगी। रोते रोते बोली " एक बात पूछूँ..??? " वह नजर उठा कर बोला "क्या? " 
वह धीरे से बोली " दो साल हो गए अलग रहते हुए " मेरी याद आती थी क्या? " वह बोला " अब बताने से भी क्या फायदा..???अब तो सब कुछ खत्म हो गया न? तलाक हो चुका है।

" रौनक बोली " दो सालों मुझे वो एक बार भी वो नींद नही आई जो आपके हाथ का तकिया बना कर सोने से आती थी। कह कर वह फफक पड़ी। बस अड्डा आ गया था। दोनों ऑटो से उतरे तो पति ने उसका हाथ पकड़ लिया। 

काफी दिनों बाद पति का स्पर्श कलाई पर महसूस हुआ तो वह भावुक हो गई। पति बोला " चलो अपने घर चलते हैं। " इतना सुनते ही रौनक बोली " तलाक के कागजों का क्या होगा..??? " पति बोला " फाड़ देंगे। इतना सुनते ही वह दहाड़ मार कर पति के गले से चिपट गई। 

पीछे पीछे दूसरे ऑटो मे आ रहे पति पत्नी के रिश्तेदार 
उनको इस हालत मे देखकर चुपचाप बस मे बैठकर चले गए।

रिश्तों को रिश्तेदारो पर मत छोड़ो, खुद निर्णय लेवें, 
आपस मे बात करो, अपनी गलती हो तो स्वीकार करो।

108 ..अलौकिक बुद्धि यहाँ है

 अलौकिक बुद्धि यहाँ है


अलौकिक बुद्धि यहाँ है
आप पुराने हो जाएँगे
वे मुझे डराने की कोशिश करते हैं
मैं पहले से ही डरा हुआ हूँ
मैं जानकारी के लिए अपने स्मार्टफ़ोन पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता हूँ
अपने दिमाग से ज़्यादा
जिसने मुझे सज़ा दी है
कि मैं पहले की तरह यादों को रखने से इनकार कर रहा हूँ
लेकिन
मुझे सबसे ज़्यादा चिंता इस बात की है
क्या मेरे प्रियजनों के साथ मेरा समीकरण बदल जाएगा
क्या मेरा दिमाग यह पढ़ना बंद कर देगा कि वे क्या संदेश देना चाहते हैं
क्या मैं अपने फ़ोन की ओर भागूँगा
ताकि उनके हर इशारे का मतलब पढ़ सकू,या 
यह भयानक विलक्षणता की पराकाष्ठा नहीं है
-इन्दिरा (वर्ड प्रेस से)

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

107 AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया। इतिहास की किताबें लिखती हैं


एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।

नेहरू ने श्रेय ले लिया।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।
इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।
Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।
AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।

वह जमीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता
AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह जमीन: न सरकार ने खरीदी, न अधिग्रहित की
यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।, आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था आजादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।

तब अमृत कौर ने:
न्यूजीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया
उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की
अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती?
वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही

AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफसरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।
नेहरू ने वास्तव में क्या किया?
पहले से बने काम को मंज़ूरी दी
भाषण दिए
फीते काटे

इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।
कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया?
क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:
कांग्रेस ने भारत बनाया
नेहरू ने संस्थान खड़े किए
सत्ता = योगदान
AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।
एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।

*हकीकत*
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नाम पट्टिका लगाई।
बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का।

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

106 चांद बाबा गवाही देंगे।

 चाँद गवाही देगा



दतिया के पास एक गाँव की कथा है। एक किसान था कोई 50 वर्ष आयु का, बलिष्ठ और क्रोधी। 
उसकी पत्नी का एक दुर्घटना में देहांत हो गया था, बाल बच्चे थे नहीं।
एक रात वह खेत पर गया तो पाया कि पड़ोसी किसान ने उसका पानी काट कर 
अपने खेत में लगा लिया है।
किसान हत्थे से उखड़ गया। बात गाली गलौज से बढ़कर मारपीट तक पहुंच गई। 
उसकी लाठी के एक प्रचंड प्रहार ने प्रतिद्वंदी का सिर खोल दिया।

दूसरा आदमी जमीन पर गिर गया। दूर दूर तक न कोई इंसान था, न जानवर।
चाँदनी रात थी और एक आदमी जमीन पर पड़ा अपनी आखिरी साँसें ले रहा था।
मरते आदमी ने सारी शक्ति जुटा कर क्षीण स्वर में कहा, “तुमको इसकी सजा मिलेगी, 
देखना।”किसान हँस दिया, “किसने देखा कि हमने मारा? गवाही कौन देगा?”
मरता आदमी मुस्कराया, उसकी आँखें अब मुँद रही थीं। “गवाही ?” - 
वह बोला तो आवाज एक कराह सी बन कर निकली,

“कोई गवाह न हो तो क्या! चाँद तो है न, चांद बाबा गवाही देंगे।”
और उसकी गर्दन एक और लुढ़क गई।
अगली सुबह पुलिस आई लेकिन कोई गवाह या सबूत न मिलने की वजह से लौट गई।
साढे ग्यारह महीने बाद किसान ने दूसरी शादी कर ली। 15 दिन बीत गए।
अधेड़ किसान नवोढ़ा पत्नी की हर फरमाइश पूरी करने की कोशिश करता था।
उस रात किसान घर की छत पर लेटा हुआ था।

पूरा चाँद निकला हुआ था। किसान कुछ पल चाँद को देखता रहा फिर ठठा कर हँसने लगा।
नववधू ने अपनी लजीली पलकें उठा कर पति को प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा।

किसान ने हँसना बंद कर दिया, “कुछ नहीं, ऐसे ही।”
लेकिन नई दुल्हन के मन में शंका आ गई कि पति उसके मायके पर हँस रहा है।
उसने रूठ कर मुँह फुला लिया। पति के लाख मिन्नतें करने के बाद भी वह मानती नहीं।

आखिरकार किसान ने राज कहीं न खोलने के लिए सैकड़ों कसमें खिला कर 
पत्नी को सारी कथा कह सुनाई।अगले दिन किसान की पत्नी ने घर आई एक 
पड़ोसन को (सैकड़ों कसमें खिला कर) कहानी बता, अपना पेट हल्का कर लिया।
पड़ोसन ने अपना कर्तव्य निभाया और आगे किसी को (सैकड़ों कसमें खिला कर) बात सरका दी।

इस मनोरम विधि से अगले दिन दोपहर तक साल भर पहले हुये कत्ल के बारे में आधा गाँव जान गया,
गाँव का सरकारी चौकीदार जान गया और जान गया निकटस्थ थाना।
शाम होते न होते कातिल किसान के हाथों में लोहे के कंगन पड़ गये।
पुलिस दल जब मुजरिम किसान को मुश्कें बाँध कर, पैदल ही ले चला तो चाँद निकल आया था।
गिरफ्तार कातिल ने एक बार आँख भर कर चाँद को देखा, फिर हँसने लगा। 
इतना हँसा कि उसकी आँखों में पानी आ गया।
थानेदार ने डपट कर पूछा, “क्या हुआ बे, दीवाना हुआ है क्या ?”
उसकी डपट से बेखबर, उसका मुजरिम कहीं दूर किसी बीते लम्हे को देख रहा था।

“उसने कहा था” किसान फुसफुसाया,
“उसने कहा था कि चाँद गवाही देगा।”
तारांकित कहानी