मुझे एक कहानी बहुत प्रीतिकर है–सूफियों की कहानी है।
किसी के इतने पास न जा
बुधवार, 15 जुलाई 2026
122 ..जिंदा में भी चमत्कार, मर कर भी चमत्कार!
शनिवार, 4 जुलाई 2026
121 सच्ची ताकत एकता में ही निहित है
कल बसंत की हल्की धूप लेने को मै अपने घर के पिछले गार्डन में गई..
उस दौरान मैंने कुछ असामान्य देखा: दर्जनों चींटियाँ पानी की एक बड़ी बोतल में गिर गई थीं।
शुरुआत में, जब वे साफ पानी में संघर्ष कर रही थीं, तो ऐसा लगा जैसे वे जीवित रहने के लिए एक-दूसरे को नीचे धकेल रही हों। यह सोचकर मुझे घृणा हुई, इसलिए मैंने अपनी नज़रें हटा लीं।
लेकिन दो घंटे बाद, उत्सुकता के कारण मैंने उन्हें फिर से देखा।
और मैं दंग रह गई।
चींटियाँ एक-दूसरे को डुबो नहीं रही थीं। उन्होंने अपने शरीरों से एक जीवित द्वीप बना लिया था — एक छोटा सा, चलता-फिरता बेड़ा। कुछ नीचे रहकर दूसरों का सहारा बनी हुई थीं, और फिर वे बारी-बारी से अपनी जगह बदल रही थीं ताकि हर किसी को आराम मिल सके।
उनमें से किसी ने भी पहले खुद को बचाने की कोशिश नहीं की।
वे पूरी शांति और बेहतरीन तालमेल के साथ हिल-डुल रही थीं, जैसे वे सभी एक बात समझती हों: जीवित रहना तभी संभव है जब सब साथ हों।
मैंने धीरे से पानी में एक चम्मच डाला। एक-एक करके, चींटियाँ बाहर निकलने लगीं —
कोई घबराहट नहीं, कोई अफरातफरी नहीं। तभी अचानक, एक कमजोर चींटी
फिसलकर वापस अंदर गिर गई।
और तभी मैंने वह देखा जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी।
आखिरी चींटी, जो पहले से सुरक्षित थी, पीछे मुड़ी। वह डूबने वाली चींटी की ओर वापस गई, मानो कह रही हो, "हिम्मत मत हारो, मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगी।"
उसने दूसरी चींटी को पकड़ा, लेकिन वह उसे अकेले नहीं उठा सकी।
इसलिए मैंने फिर से चम्मच नीचे किया — और वे दोनों सुरक्षित बाहर निकल आईं।
मैं वहां खामोश खड़ा रही।
मुझे अपनी पहली सोच पर शर्म महसूस हुई — कि वे स्वार्थी थीं। और मैं उस दृश्य से चकित थी
जो मैंने अभी देखा था: अनुशासन, लचीलापन, एकता और निस्वार्थ भाव।
यदि इतने छोटे जीव ऐसी एकजुटता के साथ काम कर सकते हैं... तो हम इंसान अक्सर उन लोगों को अनदेखा क्यों कर देते हैं जिन्हें मदद की जरूरत होती है?
सोमवार, 29 जून 2026
120 ,,गन्ने का जूस लगाना... पर सुनो, एकदम 'शुगर-फ्री' होना चाहिए
कल दोपहर भयंकर गर्मी में गन्ने के ठेले पर खड़ा होकर ₹30 वाला बड़ा ग्लास दबा रहा था। तभी वहाँ एक 'हाई-फाई डाइट कांशियस' मैडम अपनी चमचमाती गाड़ी से उतरीं। ठेले वाले से बोलीं—"भैया, एक गन्ने का जूस लगाना... पर सुनो, एकदम 'शुगर-फ्री' होना चाहिए!"
ठेले वाला अपना सिर खुजाते हुए बोला, "अरे मैडम! गन्ने के जूस से तो दुनिया में चीनी (शुगर) बनती है, इसमें से शुगर-फ्री कैसे निकालूं?" मैडम मुंह बिगाड़कर बोलीं, "मुझे नहीं पता, मैं तो सिर्फ शुगर-फ्री पीती हूँ। है तो बोलो, वरना मैं जा रही हूँ।"
ठेले वाला मना करने ही वाला था कि मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और फुसफुसाते हुए कहा, " मैडम से बोल—हाँ, शुगर-फ्री हो जाएगा, पर स्पेशल मशीन से शुगर अलग करनी पड़ेगी, इसलिए ग्लास ₹120 का पड़ेगा!"
मैडम खुशी से उछल पड़ीं, बोलीं—"हाँ-हाँ, कोई प्रॉब्लम नहीं है! मेरे लिए 'डाइट' इंपोर्टेंट है, आप बनाओ!"
ठेले वाले ने मुझे साइड में ले जाकर पूछा, "भैया, दिमाग तो ठीक है आपका? गन्ने में से शुगर अलग कैसे होगी?"
मैंने अपना 'बिजनेस कंसल्टेंट' वाला दिमाग चलाया और कहा, "अरे बुद्धू! आधा गिलास गन्ने का रस भर, और बाकी आधे में दबाकर नींबू का रस और पानी मिला दे! जूस डाइल्यूट हो जाएगा तो चीनी का इफेक्ट अपने आप कम हो जाएगा! ₹120 मिलेंगे—₹60 तेरे, ₹60 मेरे! तेरी ₹30 की कमाई को सीधे डबल कर दिया!"
ठेले वाले की आँखों में जो चमक आई, भाई साहब... सीधे अंबानी वाली थी! उसने मैडम को आधा नींबू-पानी मिला जूस थमाया, मैडम ने एक घूंट पिया और बोलीं—"वाह! एकदम प्योर शुगर-फ्री है, गन्ने का स्वाद भी आ रहा है और कैलोरी भी नहीं है!" ₹120 देकर मैडम तो पतली कमरिया मटकाते हुए चली गईं, पर पीछे हम दोनों का बिजनेस सेट हो गया!
मार्केट में डिमांड क्या है, ये मायने नहीं रखता बॉस... मायने ये रखता है कि आप कस्टमर की 'डाइट वाली सनक' को ₹120 के प्रीमियम पैकेजिंग में कैसे लपेट कर बेच सकते हो!"
"अब कुछ जलनखोर लोग आकर छाती पीटेंगे कि मैडम को चूना लगा दिया, नींबू पानी पिला दिया... अरे भाई, इसे चूना लगाना नहीं, 'कस्टमर सेटिस्फेक्शन और कंसल्टेंसी फीस' कहते हैं, जो मैडम को उनकी मनपसंद डाइट फील कराने के बदले ली गई है!"
रविवार, 21 जून 2026
119 वास्कोडिगामा ने भारत आकर किस फल का सेवन किया कि उसके सारे घाव भर गए ?
वास्कोडिगामा ने भारत आकर किस फल का सेवन किया कि उसके सारे घाव भर गए ?
यूरोप के लोगों को पता ही नहीं था कि भारत जैसा साधन संपन्न देश है, 1498 में पुर्तगाल के व्यापारी वास्कोडिगामा ने जहाज द्वारा अनेक स्थानों का भ्रमण किया जहां उसने भारत को पाया यात्रा के दौरान उसके शरीर में अनेक घाव हो गए थे जो अत्यधिक पीड़ा दे रहे थे और रक्त रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
केरल के कालीकट स्थान पर पहुंचने के बाद वास्कोडिगामा ने स्थानीय निवासियों से मुलाकात की जिन्होंने उसके घावों की मरहम पट्टी की और पपीते का सेवन करना शुरू किया कुछ ही दिनों में वास्कोडिगामा बिल्कुल ठीक हो गया उसने पपीते के बीज संग्रहित कर अपने देश ले गया। वास्कोडिगामा ने पपीते को "सुनहरा फल" कहकर संबोधित किया है।
मार्कोपोलो और उसके साथी कई दिनों से जहाज यात्रा पर सवार होकर नए देशों की खोज करने में लगे थे जिससे पोषक तत्वों की कमी के चलते हैं उन्हें स्कर्वी रोग से सामना करना पड़ा जिससे उनके मसूड़ों से खून रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था तब उन्हें किसी देश में पपीते का सेवन करवाया गया जिससे उनका स्कर्वी रोग ठीक हो गया।
अक्सर जब हमारे शरीर में प्लेटलेट्स की कमी होती है तो चिकित्सक हमें पपीते की पत्तियों का रस पीने की सलाह देता है और कुछ ही दिनों में हम ठीक हो जाते हैं उसी प्रकार पपीते के बीजों का प्रयोग भी औषधीय महत्व के लिए किया जाता है पपीता पेट की समस्याओं के लिए रामबाण सिद्ध है साथ ही विटामिन ए की खूबियों के कारण आंखों की रोशनी के लिए वरदान है। इसमें कैंसर को ठीक करने की भी खूबियां हैं।बुजुर्गों के गठिया की समस्या को दूर करता है।
सबसे प्रमुख बात यह है कि सेवन किए गए फास्ट फूड पिज़्ज़ा, चाऊमीन, बर्गर, द्वारा निर्मित जहर को पेट से निष्कासित करने का काम करता है
कुल मिलाकर यह हमारे शरीर को कंप्यूटर की तरह रिफ्रेश कर देता है।
अतः हफ्ते में एक बार स्वयं, पत्नी, और बच्चों, बुजुर्गों को पपीते का सेवन जरूर करें और स्वस्थ रहें।
रविवार, 14 जून 2026
118 ...मिट्टी के पत्तल से सीधे 'मोक्ष का शॉर्टकट'
पेरिस, मॉस्को और नासा के वैज्ञानिकों के बनारस में संन्यास लेने के बाद, पूरी दुनिया की साइकोलॉजी और न्यूरो-साइंस इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। इस बार स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख से दुनिया के सबसे बड़े 'ब्रेन मैपिंग एक्सपर्ट' और 'ह्यूमन बिहेवियर साइंटिस्ट', डॉ. लुकास हॉफमैन, बनारस पहुंचे।
उनका मानना था कि इंसान का स्वाद और उसका मूड पूरी तरह से दिमाग के केमिकल लोचा (Neurological Circuits) से कंट्रोल होता है। वे अपने साथ एक पोर्टेबल न्यूरो-स्कैनर, ब्रेन-वेव ट्रैकर और जीभ की नसों को नापने वाला एक 'सेंसरी गन' लेकर आए थे। उनका इरादा था यह समझना कि आखिर बनारस का खाना लोगों के दिमाग को कैसे 'कंट्रोल' कर लेता है।
शाम के वक्त डॉ. लुकास गोदौलिया की एक बेहद भीड़भाड़ वाली चाट की दुकान के सामने जा खड़े हुए। वहां उन्होंने देखा कि एक आदमी हाथ में पत्तल लिए खड़ा है, और हलवाई अपनी उंगली से एक कड़क गोलगप्पे (पानीपुरी) में छेद करके, उसमें चोखा भर रहा है और फिर उसे तीखे-खट्टे पानी के ड्रम में डुबोकर सीधे उस आदमी के पत्तल में फेंक रहा है। लोग बिना चबाए, पूरा का पूरा गोलगप्पा मुंह में ठँस रहे हैं और उनकी आँखों से आंसू बह रहे हैं।
लुकास ने तुरंत अपना न्यूरो-स्कैनर चालू किया और हैरान होकर चिल्लाए— "Oh My God! इस लिक्विड का एसिडिक लेवल और क्रंच इंडेक्स इंसानी दिमाग की नसों को हिला रहा है! बिना किसी स्पून के, इस तरह सीधे हाथ से खाना साइंटिफिकली अनहाइजीनिक है, फिर भी इन लोगों का हैप्पी हॉर्मोन (Dopamine) इतनी तेज़ी से ऊपर कैसे भाग रहा है?"
तभी हलवाई ने मुस्कुराकर उनके हाथ में एक पत्तल थमा दी और बोला— "बाबू, मशीन किनारे रखो। पहले एक 'गोलगप्पा चापो', फिर बात करना।"
लुकास ने जैसे ही वह पानी से भरा गोलगप्पा मुंह में रखा, तीखे, खट्टे और पुदीने के पानी का एक ऐसा ब्लास्ट हुआ कि उनके दिमाग का न्यूरो-स्कैनर वहीं हैंग हो गया। उनकी आँखें पूरी खुल गईं और उनके कान लाल हो गए।
अभी वे संभल भी नहीं पाए थे कि हलवाई ने उनके पत्तल में गरमा-गरम, कड़क 'आलू टिक्की चाट' रख दी, जिसके ऊपर गाढ़ी दही, सोंठ की मीठी चटनी और हरी मिर्च का तड़का लगा था। उसके तुरंत बाद, हलवाई ने एक समोसे को हाथ से फोड़कर, उसके ऊपर छौंकी हुई मटर और ढेर सारे मसाले डालकर 'समोसा चाट' भी परोस दी।
क्रंची गोलगप्पे का तीखापन, आलू टिक्की का सोंधा-मक्खन जैसा स्वाद, और समोसा चाट की खट्टी-मीठी गरम मिठास— इन तीनों के कॉम्बिनेशन ने लुकास के दिमाग के सारे न्यूरोलॉजिकल फॉर्मूले और साइकोलॉजी की थ्योरीज़ को एक झटके में डिलीट कर दिया। वे अपनी सेंसरी गन वहीं काउंटर पर छोड़कर, उंगलियों से पत्तल चाटने लगे।
उन्होंने अपने स्विस टैबलेट पर तुरंत नोट लिखा— "रिसर्च अपडेट: स्विट्ज़रलैंड में हम इंसानी दिमाग को शांत करने के लिए थेरेपी और दवाइयाँ देते हैं, लेकिन बनारस में 'गोलगप्पे और चाट' का यह कॉम्बिनेशन दिमाग के सारे तनाव को एक सेकंड में धो देता है। इस स्वाद में कोई मेडिकल कैलकुलेशन नहीं है, यह तो सीधे आत्मा को रिबूट करने का तरीका है।"
रात होते-होते डॉ. लुकास दुकान के बगल में नाली के किनारे कबाड़ के बेंच पर बैठ गए। उन्होंने देखा कि चाट खाने के बाद हर इंसान ऐसे मुस्कुरा रहा है जैसे उसे दुनिया का सबसे बड़ा खज़ाना मिल गया हो।
लुकास ने अपनी लाख डॉलर की ब्रेन-मैपिंग मशीन को गंगा जी में विसर्जित कर दिया और गहरी सांस लेकर बोले— "यूरोप की सारी न्यूरो-साइंस इस कड़ाही और पानी के ड्रम के सामने घुटने टेक चुकी है। हम वहां लैब में खुशी ढूंढते हैं, यहाँ तो मिट्टी के पत्तल से सीधे 'मोक्ष का शॉर्टकट' मिल रहा है।"
रात को डॉ. लुकास हॉफमैन ने ज़्यूरिख की अपनी यूनिवर्सिटी को एक छोटा सा ईमेल भेजा: "क्लिनिक तुरंत बंद कर दो! सारे न्यूरो-स्कैनर और थेरेपी मशीनें कबाड़ में बेच दो। मैंने जिंदगी भर इंसानी दिमाग को मापा, पर असली मानसिक शांति तो बनारस के इस तीखे गोलगप्पे और समोसा चाट में है। यहाँ पेट नहीं भरता, यहाँ इंसान का 'अहंकार' पिघल जाता है। मैं अब स्विट्ज़रलैंड वापस नहीं आ रहा!"
अगले दिन सुबह, अस्सी घाट की सीढ़ियों पर अब ग्यारह विदेशी बैठे थे। पुराने सभी वैज्ञानिकों के बीच अब स्विट्ज़रलैंड के डॉ. लुकास भी भगवा कुर्ता पहने, हाथ में चाय का कुल्हड़ लिए बैठे थे। लुकास साहब ज़ोर से चिल्लाए: "एलन साहब! निकोलाई साहब! अपनी साइंस और लैब को यूरोप की ट्रेनों में ही छोड़ आओ... यहाँ आओ, पहले दो पत्तल आलू टिक्की चापो... मोक्ष यहाँ चाट की दुकान पर पत्तल बिछाए खड़ा है...
-संकलन
गुरुवार, 21 मई 2026
117 ..भरता नहीं मन। भरता ही नहीं; मन का वह स्वभाव नहीं है
गुरुवार, 14 मई 2026
116 रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं
रोटी की सैकड़ों प्रजातियां हैं और कुछ तो
पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं ।
यहाँ शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ रोटी हैं
1. अफगानिस्तान
पारंपरिक बोलानी रोटी, अफगानिस्तान.
तंदूर ओवन में पकी अफगानिस्तान की बोलानी रोटी ;
बोलानी रोटी बहुत पतली परत होती है औरबिच में कई प्रकार की सामग्री भरी जाती है ,
जैसे कि आलू, पालक, दाल, कद्दू या लौकी;
2. अंगोला
अंगोला में यह बेकरी चेक गणराज्य ने तौहफे में दी है।
सफेद ब्रेड आपको यूरोपियन बैगूलेट्स की याद दिलाएंगे।
पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई पनीर दमपर रोटी
स्ट्रीक पर पकाई जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई डम्पर रोटी
4. ऑस्ट्रिया
सनफलोवेर ब्रेड जो ऑस्ट्रियाई की ग्रीष्मकालीन सैंडविच के रूप में जाना जाता है .
चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में भी सफेद आटे से बनते है ऑस्ट्रियन ब्रेड रोल
5. चेक गणराज्य
Umava जो चेक गणराज्य के दक्षिण में एक क्षेत्र है
वहा की उसी नामक पारंपरिक चेक ब्रेड ,
गहरे आटे ( राई और गेहूं के फूल) से बनी हुयी:
6. डोमिनिकन गणराज्य
डोमिनिकन गणराज्य के पहाड़ी क्षेत्रों की
मकई की रोटी ये 10 किलो का भारी पाव.
ये जानकारी कोरा से प्राप्त हुइ है
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