कल दोपहर भयंकर गर्मी में गन्ने के ठेले पर खड़ा होकर ₹30 वाला बड़ा ग्लास दबा रहा था। तभी वहाँ एक 'हाई-फाई डाइट कांशियस' मैडम अपनी चमचमाती गाड़ी से उतरीं। ठेले वाले से बोलीं—"भैया, एक गन्ने का जूस लगाना... पर सुनो, एकदम 'शुगर-फ्री' होना चाहिए!"
ठेले वाला अपना सिर खुजाते हुए बोला, "अरे मैडम! गन्ने के जूस से तो दुनिया में चीनी (शुगर) बनती है, इसमें से शुगर-फ्री कैसे निकालूं?" मैडम मुंह बिगाड़कर बोलीं, "मुझे नहीं पता, मैं तो सिर्फ शुगर-फ्री पीती हूँ। है तो बोलो, वरना मैं जा रही हूँ।"
ठेले वाला मना करने ही वाला था कि मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और फुसफुसाते हुए कहा, " मैडम से बोल—हाँ, शुगर-फ्री हो जाएगा, पर स्पेशल मशीन से शुगर अलग करनी पड़ेगी, इसलिए ग्लास ₹120 का पड़ेगा!"
मैडम खुशी से उछल पड़ीं, बोलीं—"हाँ-हाँ, कोई प्रॉब्लम नहीं है! मेरे लिए 'डाइट' इंपोर्टेंट है, आप बनाओ!"
ठेले वाले ने मुझे साइड में ले जाकर पूछा, "भैया, दिमाग तो ठीक है आपका? गन्ने में से शुगर अलग कैसे होगी?"
मैंने अपना 'बिजनेस कंसल्टेंट' वाला दिमाग चलाया और कहा, "अरे बुद्धू! आधा गिलास गन्ने का रस भर, और बाकी आधे में दबाकर नींबू का रस और पानी मिला दे! जूस डाइल्यूट हो जाएगा तो चीनी का इफेक्ट अपने आप कम हो जाएगा! ₹120 मिलेंगे—₹60 तेरे, ₹60 मेरे! तेरी ₹30 की कमाई को सीधे डबल कर दिया!"
ठेले वाले की आँखों में जो चमक आई, भाई साहब... सीधे अंबानी वाली थी! उसने मैडम को आधा नींबू-पानी मिला जूस थमाया, मैडम ने एक घूंट पिया और बोलीं—"वाह! एकदम प्योर शुगर-फ्री है, गन्ने का स्वाद भी आ रहा है और कैलोरी भी नहीं है!" ₹120 देकर मैडम तो पतली कमरिया मटकाते हुए चली गईं, पर पीछे हम दोनों का बिजनेस सेट हो गया!
मार्केट में डिमांड क्या है, ये मायने नहीं रखता बॉस... मायने ये रखता है कि आप कस्टमर की 'डाइट वाली सनक' को ₹120 के प्रीमियम पैकेजिंग में कैसे लपेट कर बेच सकते हो!"
"अब कुछ जलनखोर लोग आकर छाती पीटेंगे कि मैडम को चूना लगा दिया, नींबू पानी पिला दिया... अरे भाई, इसे चूना लगाना नहीं, 'कस्टमर सेटिस्फेक्शन और कंसल्टेंसी फीस' कहते हैं, जो मैडम को उनकी मनपसंद डाइट फील कराने के बदले ली गई है!"

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