सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

ईश्वर पर विश्वास

 ईश्वर पर विश्वास



जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घूम रही थी, 
कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिए। वहां पहुंचते ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी। 
उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे 
और बिजली कड़कने लगी।


उसने दायी तरफ देखा, तो एक शिकारी तीर का निशान, 
उसकी तरफ कर रहा था। घबराकर वह दाहिने तरफ झुकी, 
तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास 
आग पकड़ चुकी थी और पीछे की तरफ झुकी, तो नदी में जल बहुत था। 
मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीड़ा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? 
क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पाएगी ? 
क्या शावक जीवित रहेगा ? क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी? 
क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पाएगी ? क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ? 
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?

हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, 
अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का करिश्मा देखिए। 
बिजली चमकी और तीर छोड़ते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। 
उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा, 
शेर दहाड़ता हुआ इधर उधर भागने लगा। और शिकारी, 
शेर को घायल जानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। 
हिरनी ने शावक को जन्म दिया।

हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, 
जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं 
और कोई निर्णय नहीं ले पाते। 
तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व 
व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 
अन्ततः यश, अपयश, हार, जीत, जीवन, मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है। 
हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। 
कुछ लोग हमारी सराहना करेंगे, कुछ लोग हमारी आलोचना करेंगे। 
दोनों ही मामलों में हम फायदे में है एक हमें प्रेरित करेगा और 
दूसरा हमारे भीतर सुधार लाएगा।

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