रविवार, 16 दिसंबर 2018

होरी में दिल चोरी....किरण मानु बरनवाल 'अंशु'


पति की व्यस्तता से परेशान पत्नी किट्टी पार्टी तो कभी महिला मंडल की सदस्य बन मॉडर्न होने का दंभ भरते हुए समय व्यतीत कर रही थी। बच्चे पहले ही पंख लगा घोंसले से फुर्र हो चुके थे। मॉडर्न पत्नी एकाएक इस जीवनशैली से ऊबने लगी। डूबते का सहारा ऊपरवाले, सो उसने भगवान की भक्ति में ख़ुद को लीन कर लिया। दिन भर भजन-कीर्तन पूजा-पाठ, आदर्श की बातें करते-करते दो चार बरस में ही सबसे कटने लगी।

   विदेशी बच्चे घर आने पर माताजी का हाल देख बेहाल हो गये। पिता तो अपनी दुनिया में मग्न सूटबूट में बुढापा छिपाये जवानी की कुलांचें भर रहे थे। मां बेचारी योगन बनी जा रही थी। माता जी को स्मार्ट बनाने के लिए स्मार्टफ़ोन का सहारा लिया और सिखा दिया स्मार्टफोन उपयोग करना। धीरे-धीरे माताजी फ़ेसबुक की दुनिया में पदार्पण करने लगी।
फ़ेसबुक पर प्रोफ़ाइल खोला, बेचारी वृद्धा का कोई भी मित्र बनने को तैयार नहीं हुआ। पत्नी ने फ़ेक आई डी बनाई , ख़ूबसूरत-सी कन्या से सबको इश्क होने लगा। लाईक कमेंट्स आने लगे। इसी सिलसिले में बांके जवान का निमंत्रण स्वीकार कर दिल हार बैठी। चैटिंग का क्रम जारी हुआ तो होली पर साक्षात मिलने पर आ अटका। वृद्धा परेशान बगीचे में उस कमनीय काया को कहां से ले जाये।

ख़ैर, किसी तरह दिल कड़ा कर "सो-कॉल्ड" प्रियतम को सच बताने की ठानी। जी-जान से पार्लर  से मेकअप करा चल पड़ी मायावी दुनिया के आशिक से मिलने। गाल गुलाल से भी ज़्यादा गुलाबी हो रहे थे।
अरररर....ये क्या? जिन्होनें पत्नी को कभी प्यार के दो बोल नहीं बोले, वो फ़ेसबुकिया प्रेमिका के लिए तारे तोड़ने का वादा किया करता था। राहों पर फूल बिछाने को तत्पर आशिक तो ख़ुद का पति निकला। दोनों की आँखें टकराती हैं, होंठ कांप रहे थे।

एक दूसरे को धोखा देते हुए नयी ज़िंदगी के सपने धराशायी हो रहे थे। हाथों के तोते उड़ गये, महंगे उपहार मुंह चिढ़ा रहे थे।
जीवन फिर उसी बिंदु पर आ अटका जहाँ से पति-पत्नी चले थे।

-किरण मानु बरनवाल 'अंशु'

रविवार, 9 दिसंबर 2018

सफलतम मैनेजर..."एक आम गृहिणी"


कई साल पहले एक बड़े कॉर्पोरेट हाउस ने बेंगलोर में मैनेजमेंट गुरुओं 
का एक सम्मेलन कराया था।

उसमे एक सवाल पूछा गया था। आप सफलतम मैनेजर किसे मानते हैं?

विशेषज्ञों ने...
रोनाल्ड रीगन से नेल्सन मंडेला तक,
चर्चिल से गांधी तक,
टाटा से हेनरी फोर्ड तक,
चाणक्य से बिस्मार्क तक,
और न जाने कितने और नाम सुझाये।

पर ज्यूरी ने कुछ और ही सोच रखा था।
सही उत्तर था सफलतम प्रबंधक है...

"एक आम गृहिणी"

* एक गृहिणी परिवार से किसी का ट्रांसफर नहीं कर सकती।
* किसी को सस्पेंड नहीं कर सकती।
* किसी को टर्मिनेट नहीं कर सकती।
और,
* किसी को अपॉइंट भी नहीं कर सकती।
परन्तु फिर भी सबसे काम करवाने की क्षमता रखती है।
किससे, क्या और कैसे कराना है...
कब प्रेम के राग में हौले से काम पिरोना है...
और कब राग सप्तक पर उच्च स्वर में भैरवी सुना कर जरूरी कामों को 
अंजाम तक पहुंचाना है...

उसे पता होता है।
मानव संसाधन प्रबंधन का इससे बेहतर क्या उदहारण हो सकता है?
बड़े बड़े उद्योगों में भी कभी कभी इसलिए काम रुक जाता है क्योंकि जरूरी फ्यूल नहीं था या कोई स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं था या कोई रॉ मटेरियल कम पड़ गया।

पर किसी गरीब से गरीब घर मे भी नमक कम नहीं पड़ता।
शायद बहुत याद करने पर भी आप को वह दिन याद न आ पाए जिस दिन मां आपको खाने में सिर्फ इसलिए कुछ नहीं दे पाई कि बनाने को कुछ नही था या गैस खत्म हो गई थी या कुकर का रिंग खराब हो गया था।

हर कमोबेशी और हर समस्या का विकल्प एक गृहिणी रखती है।
वो भी बिल्कुल खामोशी से।
सामग्री प्रबंधन एवं संचालन, संधारण प्रबंधन का इससे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता है ?

अचानक बड़ा खर्च आ जाने पर या किसी की बीमारी पर, बाकी सब बगलें झांकने लगते हैं।
लेकिन वो फटाफट पुराने संदूको में छुपा कर रखे बचत के पैसे निकालती है।
कुछ गहने गिरवी रखती है। कुछ घरों से सिर्फ साख के आधार पर उधार लेती है।
पर पैसे का इंतजाम कर ही लाती है।
संकटकालीन अर्थ प्रबंध का इससे बेहतर क्या उदाहरण हो सकता है?

निचले इलाकों में बेमौसम बारिश में घर में पानी भरने लगे या बिना खबर अचानक चार मेहमान आ जायें।
सब के लिए आपदा प्रबंधन की योजना रहती है उसके पास।
और...
सारे प्रबंधन के लिए पास में है बस कुछ आंसू और कुछ मुस्कान।
लेकिन...
जो सबसे बड़ी चीज होती है...
वो है...
जिजीविषा, समर्पण और प्रेम
सफल गृहिणी का सबसे बड़ा संबल होता है सब्र।
वही सब्र...
जिसके बारे में किसी ने बहुत सटीक कहा है...

सब्र का घूंट दूसरों को पिलाना कितना आसान लगता है।
ख़ुद पियो तो, क़तरा क़तरा ज़हर लगता है।!

रविवार, 7 अक्तूबर 2018

एक चुटकी ज़हर.......

सिर्फ एक चुटकी ज़हर

आरती नामक एक युवती का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास के साथ अपने ससुराल में रहने लगी। कुछ ही दिनों बाद आरती को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। सास पुराने ख़यालों की थी और बहू नए विचारों वाली।
आरती और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।
दिन बीते, महीने बीते साल भी बीत गया न तो सास टीका - टिप्पणी करना छोड़ती और न आरती जवाब देना। हालात बद से बदतर होने लगे। आरती को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी. आरती के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता। अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी.
एक दिन जब आरती का अपनी सास से झगडा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई।
आरती के पिता आयुर्वेद के डॉक्टर थे. उसने रो - रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और बोली .... “आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…”
बेटी का दुःख समझते हुए पिता ने आरती के सिर पर प्यार से 
हाथ फेरते हुए कहा ... “बेटी, अगर तुम अपनी सास को ज़हर 
खिला कर मार दोगी तो तुम्हें पुलिस पकड़ ले जाएगी और साथ ही मुझे भी क्योंकि वो ज़हर मैं तुम्हें दूंगा. इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं होगा.”
लेकिन आरती जिद पर अड़ गई ... “आपको मुझे ज़हर देना ही होगा ….
 अब मैं किसी भी कीमत पर उसका मुँह देखना नहीं चाहती !”
कुछ सोचकर पिता बोले .... “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी। लेकिन मैं तुम्हें जेल जाते हुए भी नहीं देख सकता इसलिए जैसे मैं कहूँ वैसे तुम्हें करना होगा ! मंजूर हो तो बोलो ?”
“क्या करना होगा ?”, आरती ने पूछा.
पिता ने एक पुडिया में ज़हर का पाउडर बाँधकर आरती के हाथ में देते हुए कहा .... “तुम्हें इस पुडिया में से सिर्फ एक चुटकी ज़हर रोज़ अपनी सास के भोजन में मिलाना है।
कम मात्रा होने से वह एकदम से नहीं मरेगी बल्कि धीरे - धीरे आंतरिक रूप से कमजोर होकर 5 से 6 महीनों में मर जाएगी. लोग समझेंगे कि वह स्वाभाविक मौत मर गई.”
पिता ने आगे कहा ....“लेकिन तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा ताकि तुम्हारे पति को बिलकुल भी शक न होने पाए वरना हम दोनों को जेल जाना पड़ेगा ! इसके लिए तुम आज के बाद अपनी सास से बिलकुल भी झगडा नहीं करोगी बल्कि उसकी सेवा करोगी।
 यदि वह तुम पर कोई टीका टिप्पणी करती है तो तुम चुपचाप सुन लोगी, बिलकुल भी प्रत्युत्तर नहीं दोगी ! बोलो कर पाओगी ये सब ?”
आरती ने सोचा, छ: महीनों की ही तो बात है, फिर तो छुटकारा मिल ही जाएगा, उसने पिता की बात मान ली और ज़हर की पुडिया लेकर ससुराल चली आई.
ससुराल आते ही अगले ही दिन से आरती ने सास के भोजन में एक चुटकी ज़हर रोजाना मिलाना शुरू कर दिया।
 साथ ही उसके प्रति अपना बर्ताव भी बदल लिया. अब वह सास के किसी भी ताने का जवाब नहीं देती बल्कि क्रोध को पीकर मुस्कुराते हुए सुन लेती।
रोज़ उसके पैर दबाती और उसकी हर बात का ख़याल रखती।
सास से पूछ - पूछ कर उसकी पसंद का खाना बनाती, उसकी हर आज्ञा का पालन करती।

कुछ हफ्ते बीतते बीतते सास के स्वभाव में भी परिवर्तन आना शुरू हो गया. बहू की ओर से अपने तानों का प्रत्युत्तर न पाकर उसके ताने अब कम हो चले थे बल्कि वह कभी कभी बहू की सेवा के बदले आशीष भी देने लगी थी।
धीरे - धीरे चार महीने बीत गए, आरती नियमित रूप से सास को रोज़ एक चुटकी ज़हर देती आ रही थी।
किन्तु उस घर का माहौल अब एकदम से बदल चुका था, सास बहू का झगडा पुरानी बात हो चुकी थी. पहले जो सास आरती को गालियाँ देते नहीं थकती थी, अब वही आस - पड़ोस वालों के आगे आरती की तारीफों के पुल बाँधने लगी थी।
 बहू को साथ बिठाकर खाना खिलाती और सोने से पहले भी जब तक बहू से चार प्यार भरी बातें न कर ले, उसे नींद नही आती थी।
छठा महीना आते आते आरती को लगने लगा कि उसकी सास उसे बिलकुल अपनी बेटी की तरह मानने लगी हैं। उसे भी अपनी सास में माँ की छवि नज़र आने लगी थी।
जब वह सोचती कि उसके दिए ज़हर से उसकी सास कुछ ही दिनों में मर जाएगी तो वह परेशान हो जाती थी।
इसी ऊहापोह में एक दिन वह अपने पिता के घर दोबारा जा पहुंची और बोली ... “पिताजी, मुझे उस ज़हर के असर को ख़त्म करने की दवा दीजिये क्योंकि अब मैं अपनी सास को मारना नहीं चाहती … !
 वो बहुत अच्छी हैं और अब मैं उन्हें अपनी माँ की तरह चाहने लगी हूँ!”
पिता ठठाकर हँस पड़े और बोले ... “ज़हर ? कैसा ज़हर ? मैंने तो तुम्हें ज़हर के नाम पर हाजमे का चूर्ण दिया था … हा हा हा !!!”
"बेटी को सही रास्ता दिखाये,
माँ बाप का पूर्ण फर्ज अदा करे"

रविवार, 30 सितंबर 2018

अपने लिए जिए तो क्या जिएं

एक बार पचास लोगों का ग्रुप।  किसी मीटिंग में हिस्सा ले रहा था।
मीटिंग शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि  स्पीकर अचानक
ही रुका और सभी सहभागियों को गुब्बारे देते हुए बोला , ” आप
सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। ” सभी ने ऐसा ही किया। 

अब गुब्बारों को एक दूसरे कमरे में रख दिया गया। स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा। 

सारे सहभागी तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। 

पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था… 

5 पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया। 

स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक सहभागी कुछ मायूस होते हुए बोला।

“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति को दे दे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है । “, स्पीकर ने निर्दश दिया। 

एक बार फिर सभी सहभागी कमरे में गए,पर इस बार सब शांत थे और कमरे में किसी तरह की अफरा- तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दूसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।

स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा ,

 ” बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के बाद
भी उसे कुछ नहीं मिलता ,

हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है।


जब हम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जायेंगे
तो अपने आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जाएँगी।


मंगलवार, 18 सितंबर 2018

भक्त हुआ हैरान.....नवल किशोर सिंह


एक हिप्पी कट भक्त ने
भगवान की बड़ी सेवा की।
चाँदी के चकमक सिक्के चढ़ाए
और भोग लगाई, दूध,मलाई मेवा की।

मौन तपस्या में लीन थे प्रभु
कि नारद कानों में बोल गया
आखिर कबतक टिके रहते प्रभु
नारद की बातें आँखे खोल गया।

भक्त के घनघोर तप से
सिंहासन उनका डोल गया।
या चढ़ावे की चकमक से
मन उनका हो डांवाडोल गया।

हम गदगद हुए तेरी भक्ति से
प्रसन्न हो प्रभु भक्त से बोले।
माँग, तुझे कैसा वर चाहिये
यथासंभव, शब्दों में शक्कर घोले।

भक्त हुआ हैरान,परेशान
देख प्रभु का स्वरूप महान
संयमित हो फिर कहा,
प्रभु,मेरे हिप्पी कट बालों को देख
कुछ यूँ न भरमाइये।
वर तो मैं खुद ही हूँ
कहीं से एक कन्या दिलवाइये।
©नवल किशोर सिंह

मंगलवार, 11 सितंबर 2018

एक लीटर में कितना माइलेज देता है हवाई जहाज!

जान कर चौक जाएंगे आप कि एक लीटर में 
कितना माइलेज देता है हवाई जहाज!

आप अक्सर ट्रैवल करते होंगे कार्स में बाइक्स में जो आप को एक जगह से दूसरी जगह ले कर जाती है। और इसके लिए आपको खर्च करना पड़ता है कुछ फ्यूल। दुनियाभर में बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे जो आज तक हवाई जहाज में नहीं बैठे होंगे। ऐसे में उनके लिए यह जानना तो बहुत दूर की बात होगी कि हवाई जहाज एक किलोमीटर चलने में कितना इंधन इस्तेमाल करता है।

अगर हम प्लेन की बात करे तो 1 सेकंड में लगभग 4 लीटर फ्यूल की खपत करता है ,जी हां सिर्फ 1 सेकंड में 4 लीटर पेट्रोल की खपत होती है। अगर प्लेन घंटे तक चलता है तो इसे 150000 लीटर फ्यूल की जरूरत पड़ेगी। प्लेन को 1 किलोमीटर डिस्टेंस ट्रेवल करने के लिए 
12 लीटर फ्यूल की जरूरत पड़ती यहां पर एक एडवांटेज यह हो जाता है कि इसमें 465 यात्री एक साथ ट्रैवल कर सकते हैं और अगर हम हर यात्री का फ्यूल कंजर्वेशन निकाले तो एक यात्री के लिए 1 किलोमीटर जाने में 0504 लीटर फ्यूल की जरूरत पड़ती है। हवाई जहाज प्रति सेकेंड में लगभग 4 लीटर ईंधन खर्च करते हैं। बात करें तो 
बोइंग 747 की तो यह 1 मिनट की यात्रा के दौरान 
240 लीटर इंधन खर्च कर देता है।

जैसा कि हम जानते हैं अगर फ्लाइट 10 घंटे की है तो प्लेन को 150000 लीटर फ्यूल की जरूरत पड़ेगी। दोस्तो आपने अक्सर देखा होगा पिक्चर्स में TV में एक प्रेम प्लेन रनवे में खड़ी होती है तो एक छोटा सा केबल से कनेक्ट रहती है , मोबाइल चार्ज करते है वैसे 
कनेक्ट होता है। प्लेन के बॉडी लगे केबल देखकर ज्यादातर लोग सोचते हैं कि इस प्लेन में फ्यूल भरा जा रहा होगा , पर ऐसा 
बिल्कुल भी नहीं है। वह एक सैलरी ग्राउंड पावर यूनिट और 
सीपीयू सिस्टम प्लेन को इलेक्ट्रिक सप्लाई करती है। क्योंकि 
जब प्लेन रनवे में होती है तो इस प्लेन का दोनों इंजन बंद होता है , जिसकी वजह से प्लेन का इंजन इलेक्ट्रिसिटी जनरेट नहीं कर 
पाती है। इसीलिए इसे एक्सटर्नल इलेक्ट्रिसिटी सर्वर 
से कनेक्ट किया जाता है।

जिसे हम एसडीपीओ के नाम से जानते हैं। प्लेन का फ्यूल टैंक दरअसल प्लेन के बीच में होता है और इसे छोटे-छोटे 10 पार्ट में बांट दिया जाता है। फिर भी यह टैंक इतना बड़ा होता है कि चार पांच लोग आराम से घुस कर सो सकते हैं यह सारे छोटे-छोटे 10 टैंक एक दूसरे से हॉल के जरिए कनेक्टेड होते हैं। ऐसा यह होता है कि प्लेन के दोनों विंग्स में फ्यूल की मात्रा बराबर हो अगर किसी टैंक में फ्यूल कम होता है तो दूसरे टैंक का फ्यूल होल्ड से होते हुए बहके उसमें भर जाती है जिससे कि प्लैन उड़ता है।



रविवार, 26 अगस्त 2018

एक पिता का दर्द (कहानी )


आज पूनम लव मैरिज कर अपने पापा के पास आयी, और अपने 
पापा से कहने लगी "पापा मैंने अपनी पसंद के लड़के से शादी कर ली " उसके पापा बहुत गुस्सें में थे, पर वो बहुत सुलझें शख्स थे,
उन्होने बस अपनी बेटी से इतना कहा " मेरे घर से निकल जाओ " 
बेटी ने कहा -"अभी इनके पास कोई काम नही हैं, हमें रहने दीजिए 
हम बाद में चलें जायेंगे  " पर उसके पापा ने एक नही सुनी 
और उसे घर से बाहर कर दिया .........

        कुछ साल बीत गये... दुर्भाग्यवश जिस लड़के से पूनम ने शादी की थी वो उसे धोखा देकर भाग गया, पूनम की एक लड़की और एक लड़का था, पूनम खुद का एक रेस्टोरेंट चला रही थी, जिससे उसका जीवन यापन हो रहा था.........तभी पूनम के पापा चल बसे l

      पूनम को जब ये खबर हुई उसके पापा नही रहे, तो उसने मन में सोचा अच्छा हुआ, मुझे घर से निकाल दिया था, दर-दर की ठोकरें खाने छोड़ दिया, मेरे पति के छोड़ जाने के बाद भी मुझे  घर नही बुलाया, मैं तो नही जाऊंगी उनकी अंतिम यात्रा में, पर उसके ताऊ जी ने कहा -"पूनम हो आवो , जाने वाला शख्श तो चला गया अब उनसे दुश्मनी कैसी, पूनम ने पहले हाँ ना किया फिर सोचा चलो हो आती हूं, देखू तो जिन्होने मुझे ठुकराया वो मरने के बाद कैसे सुकून पाता है ............

       पूनम जब अपने पापा के घर आयी तो सब उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहें थें, पर पूनम को उनके मरने का कोई दुख नही था, वो तो बस अपने ताऊजी के कहने पर आयी थी, अब पूनम के पापा की  अंतिमयात्रा शुरू हुई, सब रो रहे थे पर पूनम दूर खड़ी हुई थी, 
जैसे तैसे सब कार्यक्रम निपट गया, आज पूनम के पापा की 
तेरहवी थी, उसके ताऊ जी आए और पूनम के हाथ में 
एक खत देते हुये कहा, ये तुम्हारे पापा ने तुम्हें दिया है, 
हो सके तो इसे पढ़ लेना..........

      रात हो चुकी थी सारे  मेहमान जा चुके थे, पूनम ने वो खत निकाला और पढ़ने लगी,उसने सबसे पहले लिखा था, 
मेरी प्यारी गुड़िया मुझे  मालूम है, तुम मुझसे नराज हो, 
पर अपने पापा को माफ कर देना, मै जानता हूं, तुम्हें मैंने घर से निकाला था, तुम्हारे पास रहने की जगह नही थी, तुम दर-दर की ठोकरें खा रही थी, पर मैं भी उदास था, तुम्हें कैसे बताऊँ.....

"याद है तुम्हें जब तुम पाँच साल की थी, तब तुम्हारी माँ हमें 
छोड़ के चली गयी थी, तब तुम कितना रोती थी, डरती थी, 
मेरे बिना सोती नही थी, रातों को उठकर रोती थी, तब मैं भी 
सारी रात तुम्हारे साथ जागता था, तुम जब स्कूल जाने से 
डरती थी, तब मैं भी सारा वक्त तुम्हारे स्कूल के खिडकी पर 
खड़ा होता था, और जैसे ही तुम स्कूल से बाहर आती थी, तुम्हें 
सीने से लगा लेता था, वो कच्चा-पक्का खाना याद है, जो 
तुम्हें पसंद नही आता था, मैं उसे फेंक कर फिर से तुम्हारे 
लिए नया बनाता था, की तुम भूखी ना रहो, याद है तुम्हें जब 
तुम्हें बुखार आया था, तो मैं सारा दिन तुम्हारे पास बैठा 
रहता था, अंदर ही अंदर रोता था, पर तुम्हें हंसाता था, 
की तुम ना रोओ वरना मैं रो पड़ता था,
वो पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा जब तुम रात भर पढ़ती थी, 
तो मैं सारी रात तुम्हें चाय बनाकर देता था,
याद है तुम्हें जब तुम पहली बार कालेज गयी थी, और तुम्हें लड़को ने छेड़ा था, तो मैं तुम्हारे साथ कालेज गया और उन बदतमीज 
लड़को से भिड़ गया, उम्र हो गयी थी, और मैं कमजोर भी, 
कुछ चोटे मुजे भी आयी थी, पर हर लड़की की नजर में पापा 
हीरो होते हैं, इसलिए अपना दर्द सह गया................

"याद है तुम्हें वो तुम्हारी पहली जीन्स वो छोटे कपड़े, वो गाड़ी, 
सारी कालोनी एकतरफ थी की ये सब नही चलेगा, लड़की 
छोटे कपड़े नही पहनेगी, पर मैं तुम्हारे साथ खड़ा था, किसी को तुम्हारी खुशी में बाधा बनने नही दिया, तुम्हारा वो रातों को देर से आना कभी-कभी शराब पीना, डिस्को जाना, लड़को के साथ घूमना, इन सब बातों को कभी मैंने गौर नही किया, क्यूकि जिस उम्र में थी उस उम्र मे ये सब थोड़ा बहुत होता हैं, ......................

       पर एक दिन तुम एक लड़के से शादी कर आयी, वो भी उस लड़के से जिसके बारे में तुम्हें कुछ भी पता नही था, तुम्हारा पापा हूं, मैंने उस लड़के के बारे मे सब पता किया, उसने ना जाने वासना 
और पैसे के लिए कितनी लड़कियों को धोखा दिया, पर तुम तो 
उस वक्त प्रेम में अंधी थी, तुमने एक बार भी मुझसे नही पूछा, 
और सीधा शादी कर के आ गयी, मेरे कितने अरमान थें, तुम्हें 
डोली में बिठाऊ, चाँद, तारों की तरह तुम्हें सजाऊ, ऐसी धूमधाम 
से शादी करूँ की लोग बोल पड़े वो देखों शर्माजी जिन्होने अपनी 
बच्ची को इतने नाजों से अकेले पाला हैं, पर तुमने मेरे सारे ख्वाब 
तोड़ दियें, "खैर" इन सब बातों का कोई मतलब नही हैं,मैंने तो 
तुम्हारें लिए खत इसलिए छोड़ा है की कुछ बात कर सकूं.......

     मेरी "गुड़िया" आलमारी में तुम्हारी माँ के गहने और मैंने जो तुम्हारी शादी के लिए गहने खरीदें तो वो सब रखें हैं, तीन चार घर 
और कुछ जमीनें है मैंने सब तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के नाम कर 
दी हैं, कुछ पैसें बैंक में है तुम बैंक जाकर उसे निकाल लेना,
"और आखिरी में बस इतना ही कहूंगा गुडिया काश तुमने मुझे  
समझा होता मैं तुम्हारा दुश्मन नही था, तुम्हारा पापा था, वो पापा जिसने तुम्हारी माँ के मरने के बाद भी, दूसरी शादी नही की लोगो 
के ताने सुने, गालियाँ सुनी, ना जाने कितने रिश्तें ठुकराए 
पर तुम्हें दूसरी माँ से कष्ट ना हो इसलिए खुद की ख्वाहिशें मार दी....

अंत में बस इतना ही कहूंगा मेरी गुड़िया, जिस दिन तुम शादी के 
जोड़े पर घर आयी थी ना, तुम्हारा बाप पहली बार टूटा था, तुम्हारे 
माँ के मरने के वक्त भी उतना नही रोया जितना उस वक्त 
और उस दिन से हर दिन रोया इसलिए नही की समाज,जात,परिवार,रिश्तेदार क्या कहेंगें....

        इसलिए वो जो मेरी नन्ही सी गुड़िया मुझे हर बात बताती थी , पर जिसने शादी का इतना बड़ा फैसला लिया पर मुझे  एक बार भी बताना सही नही समझा, गुड़िया अब तो तुम भी माँ हो औलाद का 
दर्द खुशी सब क्या होता हैं, वो जब दिल तोड़ते हैं तो कैसा लगता हैं, ईश्वर तुम्हें कभी ना ये दर्द की शक्ल दिखाए, एक खराब पिता ही समझ के मुजे माफ कर देना मेरी गुड़िया, तुम्हार पापा अच्छा नही था, जो तुमने उसे इतना बड़ा दर्द दिया, अब खत यही समाप्त कर रहा हूं, हो सकें तो माफ कर देना, और खत के साथ एक ड्राइंग लगी थी जो खुद कभी पूनम ने बचपन में बनाई थी, और उसमें लिखा था आई लव यू मेरे पापा मेरे हीरो मैं आपकी हर बात मानूंगी, ........

        पूनम रो ही रही थी, उतने में उसके ताऊजी आ गयें, पूनम ने उन्हें रोते-रोते सब बताया, पर एक बात उसके ताऊजी ने बताई, उसके ताऊजी ने कहा-" पूनम वो जो तुम्हें रेस्टोरेंट खोलने और घर खरीदने के पैसे मैंने नही दिये थे, वो पैसे तुम्हारे पिताजी ने मुझसे दिलवाए थे, क्यूकि औलाद चाहे कितनी भी बुरी हो , माँ-बाप कभी बुरे नही होते, औलाद चाहे माँ-बाप को छोड़ दे माँ-बाप मरने के बाद भी अपने बच्चों को दुआ देते हैं, 
दोस्तों पूनम के पापा को सुकून मिलेगा या नही मुजे नही पता, 
पर उस खत को पढ़ने के बाद, शायद सारी जिंदगी, पूनम को 
सुकून नही मिलेंगा ...........

      बस इतना ही कहूंगा, आखिर में दोस्तों, लव मैरिज शादी करना कोई गलत बात नही, पर यही अपने माँ-पिताजी की मर्जी शामिल 
कर लें, पत्थर से पानी निकल जाता हैं, वो तो माँ-बाप है ना कब 
तक नही टूटेंगें अपने बच्चों की खुशी के लिए, हर बाप की एक 
इच्छा होती हैं अपनी बेटी को अपने हाथों से डोली में विदा करने की 
हो सकें तो उसे एक सपना मत रहने दीजिए l