रविवार, 5 अप्रैल 2026

104 कम नहीं समझिएगा

भण्डारा
 बहू ने आईने में लिपस्टिक ठीक करते हुए कहा -

"माँ जी, आप अपना खाना बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी में जाना है ...!!"

बूढ़ी माँ ने कहा - "बेटी मुझे गैस वाला चूल्हा चलाना नहीं आता ...!!"

तो बेटे ने कहा - "माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है , तुम वहाँ चली जाओ ना,
खाना बनाने की कोई नौबत ही नहीं आयेगी....!!!"


माँ चुपचाप अपनी चप्पल पहनकर मंदिर की ओर चल दीं.....

यह पूरा वाक्या 10 साल का बेटा रोहन सुन रहा था।

पार्टी में जाते वक्त रास्ते में रोहन ने अपने पापा से

कहा - "पापा, मैं जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ना, तब मैं भी
अपना घर किसी मंदिर के पास ही बनाऊंगा ....!!!"

क्योंकि माँ, जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना होगा तब तुम भी तो
किसी मंदिर में भंडारे में खाना खाने जाओगे ना, और मैं नहीं चाहता कि
तुम्हें कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े....!!!!

अब आगे....।।

बेटे ने कार वापस मोड़ ली और घर पहुंचे। रास्ते में दोनों ने तय किया कि 
जाते ही माँ के पैर पकड़ कर माफी मांग लेंगे।

नीचे पार्किंग में कार खड़ी करके जब दोनों 10वीं मंजिल पर अपने फ्लैट में पहुंचे तो अंदर से
जोर - जोर से म्यूजिक सिस्टम बजने की और कई लोगों के जोर - जोर से हँसने
और बातें करने की आवाजें आ रही थीं। 
बेटे ने घंटी बजाई।

अंदर से माँ जी की आवाज आई, " शारदा जी, दरवाजा खोल दीजिये,
लगता है आज पिज्जा जल्दी आ गया। "

जब दरवाजा खुला तो सामने बगल के फ्लैट में रहने वाले शर्मा जी की माँ शारदा देवी खड़ी थीं।

अंदर घर में माँ जी जीन्स और पीला टॉप पहने घूम रही थीं। कमरे में उसी बिल्डिंग में रहने वाले
माँ जी के हमउम्र आठ - दस महिलाएं और पुरुष थे। सभी के हाथ में ठंडी पेप्सी के ग्लास थे,
और सबके पैर म्यूजिक सिस्टम में बज रहे "पानी, पानी, पानी......." गाने पर थिरक रहे थे।

बेटे - बहू को देखकर पहले तो माँ जी कुछ सकपका गईं पर फिर उन्होंने संभलते हुए कहा, "क्या हुआ बेटा, पार्टी कैंसिल हो गई क्या? कोई बात नहीं, हमारी पार्टी ज्वाइन कर लो, मैं तीन पिज्जा और ऑर्डर कर देती हूँ।

मोरल - मोरल -वोरल कुछ नहीं ! बस आजकल के बुजुर्गों को बेबस, लाचार और कमजोर समझने की गलती कभी मत करो, क्योंकि तुम आज जिस स्कूल में पढ़ रहे हो, वो कभी वहाँ के हेडमास्टर थे!




शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

103 ..दीवान बहादुर रायसाहब दाऊ कल्याण सिंह जी


दीवान बहादुर रायसाहब दाऊ कल्याण सिंह जी 

ये है छत्तीसगढ़ की पावन धरा के महादानी दीवान बहादुर रायसाहब दाऊ कल्याण सिंह जी रायपुर शहर का
प्रतिष्ठित डी. के. हॉस्पिटल इन्ही के नाम पर है दाऊ जी ने 1944 में डी के अस्पताल वाली जमीन के साथ में भवन निर्माण के लिये 1,25,000/- नगद (वर्तमान की गणना में लगभग 70 करोड़) भी दिये थे,
दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी का जन्म 04/04/1876 को हुआ था दाऊ जी को लोग सिर्फ डी के अस्पताल की जमीन के दानदाता के रूप में जानते हैं,
पर ये परिचय इस महान दानदाता के लिए काफी नहीं है। आज का एम्स अस्पताल जो कि पुराना टी.बी. अस्पताल भी दाऊ जी की दान की हुई जमीन पर ही बना है। लभान्डी की जमीन के साथ कृषि महाविद्यालय और गरीब छात्रों के हास्टल निर्माण के लिए 112000/- (वर्तमान के लगभग 62 करोड़ रूपये), टी.बी.अस्पताल के लिए 323 एकड़ जमीन, रायपुर जगन्नाथ मंदिर के खर्चे के लिये संपूर्ण खैरा ग्राम का दान,कृषि पर रिसर्च के लिये बरोंडा ग्राम में जमीन, भाटापारा में कृषि विज्ञान हेतू विशाल जमीन, भाटापारा में अकाल के समय कल्याण सागर जलाशय का निर्माण, भाटापारा में विशाल मवेशी अस्पताल,गरीबों के लिये पुस्तकालय का निर्माण जैसे अनेकों पुण्य कार्य इस महादानी ने छत्तीसगढ़ में किये।
छत्तीसगढ़ के बाहर भी इस पुण्यात्मा ने अनेकों महादान किये जिसमें प्रमुख हैं नागपुर के लेडी ईरविन हास्पिटल के निर्माण में सहयोग, सेन्ट्रल महिला कॉलेज के निर्माण में मुख्य दान, बिहार के भूकंप में महादान,वर्धा की भयंकर बाढ़ में दिल खोलकर दान दिया। दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल आज के बड़े उद्योपतियों से कई गुना ज्यादा धनवान थे।उन्होंने 1937 में लगभग 70000/- राजस्व पटाया था।(आज की गणना में लगभग 39 करोड़ से अधिक) आज इस महादानी,छत्तीसगढ़ के गौरव का नाम कहीं खो गया है खुद छत्तीसगढ़ के वासी भी इस महान माटीपुत्र के बारे में ज्यादा या कुछ भी नहीं जानते।  
 
 

शनिवार, 28 मार्च 2026

102..तीन पहर तो बीत गये

 तीन पहर तो बीत गये,



गुरुवार, 26 मार्च 2026

101-युद्ध के आखिर में जला

 युद्ध के आखिर में जला


एक जला हुआ जमीन का टुकड़ा 
बारुद की फसल गल गई होगी.

सैकड़ो ं बदबूदार जिस्म फैले होंगे 
जमीन के ऊपर, जिन्हे कब्रें नसीब नहीं हुई.

जले जिस्म, हथियार और घर,
सब गड्ड-मड्ड हो जाएंगे 
एक दूसरे के साथ

और आखिर में तुम उन सब पर फूल चढ़ाओगे
दुआ मांगोगे उनकी शांति के लिए,
प्रार्थनाएं करोगे और मोमबत्तियां जलाओगे 

आने वाली पीढ़ियों को सुनाओगे
सदियों तक,
उस अनचाही युद्ध की दास्तां
जो कभी नहीं चाही थी,
उस जली हुई जमीन ने,

सड़े हुए जवान जिस्मों ने,
और एक उजड़ी हुई सभ्यता ने,

एक युद्ध जिसे, 
एक सभ्य दुनिया ने थोपा था ,
सभ्यता के खिलाफ

- चंडीगढ़ के प्रवीण चौबे

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

ईश्वर पर विश्वास

 ईश्वर पर विश्वास



जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घूम रही थी, 
कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिए। वहां पहुंचते ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी। 
उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे 
और बिजली कड़कने लगी।


उसने दायी तरफ देखा, तो एक शिकारी तीर का निशान, 
उसकी तरफ कर रहा था। घबराकर वह दाहिने तरफ झुकी, 
तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास 
आग पकड़ चुकी थी और पीछे की तरफ झुकी, तो नदी में जल बहुत था। 
मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीड़ा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? 
क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पाएगी ? 
क्या शावक जीवित रहेगा ? क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी? 
क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पाएगी ? क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ? 
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?

हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, 
अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का करिश्मा देखिए। 
बिजली चमकी और तीर छोड़ते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। 
उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा, 
शेर दहाड़ता हुआ इधर उधर भागने लगा। और शिकारी, 
शेर को घायल जानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। 
हिरनी ने शावक को जन्म दिया।

हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, 
जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं 
और कोई निर्णय नहीं ले पाते। 
तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व 
व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 
अन्ततः यश, अपयश, हार, जीत, जीवन, मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है। 
हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। 
कुछ लोग हमारी सराहना करेंगे, कुछ लोग हमारी आलोचना करेंगे। 
दोनों ही मामलों में हम फायदे में है एक हमें प्रेरित करेगा और 
दूसरा हमारे भीतर सुधार लाएगा।