रविवार, 6 मई 2018

रविवार की छुट्टी का काला सच

रविवार की छुट्टी का काला सच जिसे कोई नही जानता

हम सबको को सप्ताह में रविवार की छुट्टी का इंतजार रहता है 
लेकिन इस छुट्टी का इतिहास कोई नही जानता है। हम सब जानते हैं की हमे आजादी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा था।उसी प्रकार हमें रविवार की छुट्टी के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। जब भारत में 
अंग्रेजो का शासन था तो भारत के मजदूरों और कर्मचारियों को सप्ताह के सातों दिन कार्य करना पड़ता था।

तब यह सब देखकर मजदूरों के नेता श्री नारायण मेघा जी लोखंडे ने सप्ताह में एक दिन की छुट्टी का प्रस्ताव अंग्रेजो के सामने रखा था।उन्होंने ब्रिटिश सरकार से कहा कि हमारे मजदुरों और कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन की मिलना चाहिए जिससे वह एक दिन का समय आराम से उनके परिवार और मित्रों के साथ बिता सके।

इन सब के साथ श्री नारायण ने रविवार का दिन चुना क्योकि रविवार के दिन अंग्रेज चर्च जाते थे और यह हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान खण्डोभ का दिन था।लेकिन अंग्रेजों ने उनके इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।इसके बाद आठ सालों तक संघर्ष चला जिसके बाद अंग्रेजों ने रविवार की छुट्टी देने की घोषणा की थी।




7 टिप्‍पणियां:

  1. क्या अंग्रेजों के यहाँ रविवार कि छुट्टी नही होती थी...

    ज्ञानवर्धक

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  2. बहुत सुंदर...ज्ञानवर्धक

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (07-05-2017) को "मिला नहीं है ठौर ठिकाना" (चर्चा अंक-2963) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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