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बुधवार, 8 जनवरी 2025

03 ... ऐ बसन्ती पात पीले

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  गीतिका छन्द (एक बंद ब्लॉग से) ऐ बसन्ती पात पीले, हाथ पीले मैं चली, बिछ गई रौनक सजीली, है छबीली हर कली । आम पर नव बौर आई, ठौर पाई रीत की, र...
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