किसी के इतने पास न जा

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रविवार, 29 अप्रैल 2018

मेरे पापा की 'औकात' ...प्रस्तुतिः मनोहर वासवानी

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पाँच दिन की छुट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे।  अंदर प्रवेश किया तो छोटे से गैराज में चमचमाती गाड़...
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रविवार, 11 जून 2017

मारकर भी खिलाता है...व्हाट्स एप्प से

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जो सबके हृदय की धड़कनें चलाता है,  भक्तवत्सल है वह  अपने भक्त का वचन पूरा किये बिना शांत कैसे रहता मलूकचंद नाम के एक सेठ थे। उन...
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कुछ खास नहीं....पढ़ता हूँ...पंसदीदा रचनाओं को यहां सहेज लेता हूँ.....

  • Digvijay Agrawal
  • yashoda Agrawal
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