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रविवार, 17 दिसंबर 2017

आजादी.....मीना पाण्डेय

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पहली रोटी मैंने अभी तवे पर डाली ही थी। ‘माँ, मैं कैसी लग रही हूँ ?‘ रोहिणी ने आते ही पूछा।  मैं कुछ कहती इससे पहले उसका फोन बजने लगा। वह ...
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कुछ खास नहीं....पढ़ता हूँ...पंसदीदा रचनाओं को यहां सहेज लेता हूँ.....

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