किसी के इतने पास न जा
प्रशान्त पांडेय
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
प्रशान्त पांडेय
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 16 जुलाई 2017
‘पगलिया’.......प्रशान्त पांडेय
›
एगो कुसुमिया है. हड़हड़ाते चलती है. मुंह खोली नहीं की राजधानी एक्सप्रेस फेल. हमरे यहां काम करने आती है. टेंथ का एक्जाम था तो काम छोड़ दी थी....
5 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें