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बुधवार, 2 अगस्त 2017

टूटा पहिया....धर्मवीर भारती

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मैं रथ का टूटा पहिया हूँ लेकिन मुझे फेंकों मत क्या जाने कब इस दुरूह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ कोई दुस्साहसी...
3 टिप्‍पणियां:
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कुछ खास नहीं....पढ़ता हूँ...पंसदीदा रचनाओं को यहां सहेज लेता हूँ.....

  • Digvijay Agrawal
  • yashoda Agrawal
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