किसी के इतने पास न जा
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
बने भगवान बैठे हैं.....राहुल कुमार
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यहाँ कुछ लोग तो खुद को, खुदा ही मान बैठे हैं कराते अपनी' ही पूजा बने भगवान बैठे हैं। मगर है जुर्म औ दहशत, ही' कारोबार बस ...
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बुधवार, 30 अगस्त 2017
शब्द.....श्रीमती डॉ. प्रभा मुजुमदार
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मेरे लिये शब्द एक औजार है. भीतर की टूट-फूट उधेडबुन अव्यवस्था और अस्वस्थता की शल्यक्रिया के लिये। शब्द एक आईना, यदा-कदा अपने स्वत्व स...
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मंगलवार, 29 अगस्त 2017
माँ की व्यथा....आभा नौलखा
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आज यह कड़ा निर्णय लेते हुए निकुंज की आँखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी एक चलचित्र की भाँति घूम गई। उसे आज भी याद है वह शाम जब मम्मी-पापा न...
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सोमवार, 28 अगस्त 2017
लिखने वाला क्यों लिखता है....पावनी दीक्षित "जानिब"
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लिखने वाला क्यों लिखता है मिलन के साथ बिछोड़े दिल में प्यार का महल बनाकर ये बनके पत्थर तोड़े। । कोई कसक है धड़कन में दिल मुश्किल से ...
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रविवार, 27 अगस्त 2017
तुम्हें बेवफा मान लेते जो पहले...नवीन मणि त्रिपाठी
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122 122 122 122 अगर मेरे दिल पे हुकूमत न होती । तो फिर आपकी भी रियासत न होती ।। पलट जाती कश्ती भी तूफां में मेरी । मेरे पास उ...
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शनिवार, 26 अगस्त 2017
आईना भी ख़फ़ा हो गया.....डॉ.यासमीन ख़ान
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तू जो मुझसे जुदा हो गया आईना भी ख़फ़ा हो गया।। ढ़ूंढ़ती हूँ उसे दर- ब- दर। जो हसीं पल हवा हो गया।। पहले ऐसा नहीं था कभी वक्...
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सोमवार, 21 अगस्त 2017
गाली.....-अरुण कुमार
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दस बजे बड़े बाबू ने कार्यालय में प्रवेश किया और कुर्सी पर बैठने से पहले उस पर उँगली फिराकर गुस्से और रौब से चीखा, ‘‘अबे चर...
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