मंगलवार, 5 सितंबर 2017

सितम भी सहा कीजिए....डॉ. डी.एम. मिश्र


इस जहाँ का चलन भी निभा दीजिए
और अपने भी दिल का कहा कीजिए।

खोज में आप जिसकी परेशान हैं
पास में ही न हो ये पता कीजिए।

एक भी आप दुश्मन नहीं पायेगे
बस ,ज़रा और दिल को बड़ा कीजिए।

प्यार जैसा मज़ा पा लिया है अगर
मुस्कराकर सितम भी सहा कीजिए।
-डॉ. डी.एम. मिश्र

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! कविता ने अधरों पर मुस्कान ला दी. सुंदर कविता

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  2. एक भी आप दुश्मन नहीं पायेगे
    बस ,ज़रा और दिल को बड़ा कीजिए।

    बेहद दिलकश। वाह

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  3. बहुत उम्दा लिखा है डॉ साहब।

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